शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
राजनीतिक डैमेज कंट्रोल की ‘अग्निपरीक्षा’
शुद्धिकरण’ पर घिरी भाजपा, कांग्रेस का तंजकृमाफी मांगने हल्द्वानी आ रहे नितिन नबीन
नबीन के दौरे से गरमाई सियासत, कांग्रेस बोलीकृखड़गे के अपमान का जवाब दे भाजपा
हल्द्वानी बनेगा भाजपा और कांग्रेस के राजनीतिक संदेशों और जवाबी नैरेटिव का बड़ा मंच
देहरादून। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हल्द्वानी दौरे से और गरमा गया है। नबीन के प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के लिए हल्द्वानी पहुंचने से पहले कांग्रेस ने भाजपा पर सीधा राजनीतिक हमला बोल दिया है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हल्द्वानी में शुद्धिकरण विवाद पर माफी मांगने आ रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से नबीन के दौरे को संगठनात्मक कार्यक्रम बताया जा रहा है और उनके दौरे को माफी से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह नबीन के दौरे को विवाद से जोड़ दिया है, उससे साफ है कि हल्द्वानी में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति अब सिर्फ संगठन की बैठक नहीं रहने वाली। यह बैठक राजनीतिक संदेशों और जवाबी नैरेटिव का बड़ा मंच बन सकती है।
खड़गे की हल्द्वानी सभा के बाद रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण को लेकर विवाद ने कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का मौका दे दिया। कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस का आरोप है कि देश की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दलित समाज से आने वाले वरिष्ठ नेता की सभा के बाद इस तरह की कार्रवाई का कथित तौर पर होना बेहद गंभीर है। अब कांग्रेस इसी मुद्दे को लेकर नबीन के हल्द्वानी दौरे पर सवाल खड़े कर रही है।
कांग्रेस का कहना है कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष को पहले इस पूरे घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। पार्टी नेताओं का दावा है कि यदि भाजपा इसे गलत मानती है तो उसे सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। नबीन का हल्द्वानी दौरा ऐसे समय हो रहा है जब उत्तराखंड की राजनीति धीरे-धीरे 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में संगठन को चुनावी मोड में लाने, बूथ स्तर पर तैयारियों और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति पर मंथन की उम्मीद है। लेकिन कांग्रेस ने पहले ही बैठक के राजनीतिक एजेंडे में शुद्धिकरण विवाद को शामिल कर दिया है। यानी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने चुनौती सिर्फ कार्यकर्ताओं को चुनावी संदेश देने की नहीं होगी। कांग्रेस के हमले का जवाब देना भी राजनीतिक मजबूरी बन सकता है।
यदि भाजपा इस मुद्दे पर चुप रहती है तो कांग्रेस इसे माफी से बचने के रूप में प्रचारित कर सकती है। यदि राष्ट्रीय नेतृत्व इस विवाद पर कोई टिप्पणी करता है तो मामला और राष्ट्रीय सुर्खियों में आ सकता है। कांग्रेस के लिए यह विवाद महज एक स्थानीय घटना नहीं है। पार्टी इसे भाजपा की विचारधारा, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। खड़गे के हल्द्वानी दौरे को कांग्रेस पहले ही कुमाऊं में अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के अभियान के रूप में देख रही थी। अब शुद्धिकरण विवाद ने उसे भाजपा पर हमला करने के लिए एक अतिरिक्त मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस की रणनीति साफ दिखाई दे रही हैकृखड़गे के कथित अपमान को 2027 के चुनावी विमर्श से जोड़ना।
भाजपा की ओर से नबीन का दौरा संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रदेश कार्यसमिति में आगामी चुनाव को लेकर संगठन की दिशा तय होगी। सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने की रणनीति पर भी चर्चा संभव है। लेकिन कांग्रेस ने नबीन के हल्द्वानी पहुंचने से पहले ही सवाल खड़ा कर दिया हैकृकि क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ संगठन की बैठक करने आ रहे हैं या शुद्धिकरण विवाद पर भाजपा का रुख भी स्पष्ट करेंगे? यही सवाल अब हल्द्वानी की सियासत के केंद्र में है।
कांग्रेस के लिए राजनीतिक गणित भी दिलचस्प है। यदि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष इस विवाद पर खेद या माफी जैसा कोई बयान देते हैं तो कांग्रेस इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकती है। दूसरी तरफ यदि भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक साजिश बताकर खारिज करती है तो कांग्रेस हमले को और तेज कर सकती है। इसलिए नबीन का हल्द्वानी दौरा भाजपा के लिए संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ राजनीतिक डैमेज कंट्रोल की परीक्षा भी बनता दिखाई दे रहा है। हल्द्वानी में खड़गे आए थे तो कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला था। अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उसी शहर में आ रहे हैं। मंच भाजपा का होगा, लेकिन कांग्रेस ने सवाल पहले ही उछाल दिया हैकृशुद्धिकरण पर जवाब कब?
उत्तराखंड की 2027 की चुनावी लड़ाई में यह विवाद कितना बड़ा मुद्दा बनता है, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि हल्द्वानी की सियासत में खड़गे के बाद नबीन की एंट्री ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
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