मंगलवार, 8 सितंबर 2026
न दांव-पेच, न बयानबाजी
उत्तराखंड की सियासत में चुपचाप तीसरा विकल्प गढ़ने की होड़
शुद्धिकरण की लड़ाई से मिला खुला स्पेस, आप-यूकेडी की पैठ
बडे़ दलों की तकरार में छोटे दल तलाश रहे सूबे में सियासी जमीन
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 2027 का चुनावी माहौल बनने लगा है। भाजपा और कांग्रेस हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर आमने-सामने हैं। आरोप-प्रत्यारोप और प्रदर्शन के बीच आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल अपेक्षाकृत खामोशी से अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। यही इस समय प्रदेश की राजनीति का दिलचस्प पहलू हैकृ। दो बड़े दल एक-दूसरे से लड़ रहे हैं और छोटे दल जनता के बीच अपनी जगह तलाश रहे हैं। उत्तराखंड में 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुकी आप अब संगठन को मजबूत करने और भाजपा-कांग्रेस से अलग राजनीतिक विकल्प पेश करने की कोशिश में है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उसके निशाने पर हैं। लेकिन पहाड़ी राजनीति में केवल मुद्दे काफी नहीं। स्थानीय संगठन और भरोसेमंद नेतृत्व आप की सबसे बड़ी चुनौती हैं। अगर पार्टी इन्हें मजबूत कर पाती है तो वह कुछ सीटों पर मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
यूकेडी के पास उत्तराखंड आंदोलन की विरासत और पहाड़ के सवालों की राजनीतिक जमीन है। पलायन, रोजगार, जल-जंगल-जमीन और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार उसके पुराने मुद्दे हैं। मगर राज्य गठन के बाद पार्टी अपना जनाधार कायम नहीं रख सकी। 2027 उसके लिए राजनीतिक वापसी की बड़ी परीक्षा है। सवाल यह है कि क्या वह उत्तराखंडियत के मुद्दे को फिर से मतदाता की प्राथमिकता बना पाएगी?
शुद्धिकरण विवाद ने भाजपा-कांग्रेस को एक-दूसरे पर हमला करने का नया मौका दिया है। लेकिन इसी बीच बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा जैसे सवाल पीछे छूट रहे हैं। यहीं छोटे दलों के लिए राजनीतिक अवसर बनता है। युवा नौकरी पूछ रहा है, पहाड़ पलायन का जवाब मांग रहा है और गांव बुनियादी सुविधाओं की। अगर आप और यूकेडी इन सवालों को लगातार जमीन पर उठाते हैं तो भाजपा-कांग्रेस के बीच नाराज मतदाताओं के लिए विकल्प बनने की कोशिश कर सकते हैं।
फिलहाल आप या यूकेडी को भाजपा-कांग्रेस के बराबर खड़ा करना जल्दबाजी होगी। दोनों दलों के सामने संगठन, संसाधन और सीटों तक पहुंच बनाने की बड़ी चुनौती है। लेकिन चुनावी राजनीति में कुछ सीटों पर सीमित वोट भी बड़ा खेल बदल सकते हैं। यदि मुकाबला कई सीटों पर त्रिकोणीय हुआ तो दोनों प्रमुख दलों के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
2027 की लड़ाई अभी लंबी है, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ हैं। भाजपा और कांग्रेस अगर एक-दूसरे को घेरने में ही उलझे रहे तो आप और यूकेडी के लिए जगह बन सकती है। फिलहाल यह जगह छोटी है, लेकिन चुनावी राजनीति में छोटा सियासी सुराख भी बड़े समीकरण बदल सकता है।
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