शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

सेवा संकल्प के बहाने भाजपा की चुनावी तैयारी

चुनाव की तारीखों से पहले ही जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और संगठन की ताकत परखने की कवायद ज़िले से लेकर मंडल स्तर तक सेवा सेतु और बहुउद्देशीय शिविरों के जरिए जनता के बीच पहुंचेगी पार्टी भाजपा के पास जनता की नब्ज टटोलने, उपलब्धियां गिनाने और संगठन को बूथ तक कसने का मौका देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तारीख भले अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां लगातार चुनावी रंग ले रही हैं। इसी क्रम में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान महज सेवा कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और संगठन की जमीनी सक्रियता परखने का बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। अभियान के तहत 11 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं और इन्हें जिलों से लेकर मंडल स्तर तक ले जाने की तैयारी है। भाजपा की घोषित रणनीति में सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार को केंद्र में रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार अभियान के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से हुए बदलाव तथा लाभार्थियों की कहानियों को जनता के सामने रखा जाएगा। सेवा सेतु जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और शिविरों के जरिए संवाद करने की भी योजना है। यहीं से इस अभियान का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। चुनावी वर्ष में किसी भी दल के लिए जनता से सीधा संपर्क केवल संगठनात्मक गतिविधि नहीं होता। वह यह समझने का माध्यम भी बनता है कि सरकार की योजनाओं को लेकर जमीन पर क्या प्रतिक्रिया है, किन वर्गों तक लाभ पहुंचा है और किन मुद्दों पर लोगों की शिकायतें बरकरार हैं। भाजपा के सामने इस समय एक तरफ सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच स्थापित करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ संगठन को चुनावी मोड में सक्रिय बनाए रखने की जरूरत है। पार्टी पहले ही बूथ सशक्तीकरण, शक्ति केंद्र बैठकों और घर-घर संपर्क जैसे कार्यक्रमों के जरिए संगठन को अंतिम छोर तक सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। ऐसे में सेवा संकल्प अभियान इन गतिविधियों को व्यापक जनसंपर्क से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। पार्टी ने अभियान के अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारी मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को भी सौंपी है। इससे सरकार और संगठन के बीच समन्वय की परीक्षा भी होगी। भाजपा का जोर केंद्र और राज्य की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने पर है। आशीर्वाद का दीया, नमो सेवा गाथा, कहानी बदलाव की, सेवा मेरा योगदान और सेवा सेतु जैसे कार्यक्रम इसी उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। लेकिन राजनीतिक रूप से असली सवाल यह होगा कि क्या योजनाओं का लाभ पाने वाला वर्ग उसी अनुपात में सरकार के पक्ष में राजनीतिक समर्थन भी व्यक्त करता है? यह स्वतः मान लेना उचित नहीं होगा। लाभार्थी की संतुष्टि कई मुद्दों में से एक हो सकती है। रोजगार, महंगाई, पलायन, स्थानीय विकास, भू-कानून, मूल निवास और सरकारी भर्ती जैसे सवाल भी मतदाताओं के राजनीतिक रुख को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि सेवा संकल्प अभियान भाजपा के लिए केवल उपलब्धियां बताने का मंच नहीं, बल्कि फीडबैक लेने की जमीन भी बन सकता है। भाजपा के इस अभियान ने कांग्रेस के सामने भी राजनीतिक चुनौती खड़ी की है। यदि भाजपा घर-घर जाकर सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं का प्रचार करती है तो कांग्रेस को उसी जनता के बीच सरकार के दावों की पड़ताल और अपने मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखने की जरूरत होगी। कांग्रेस के लिए रोजगार, महंगाई, भर्ती परीक्षाओं, पलायन, कानून-व्यवस्था और विकास के सवाल पहले से राजनीतिक मुद्दे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में मुकाबला केवल भाषणों और प्रेस वार्ताओं तक सीमित रहने के बजाय सरकार ने क्या किया बनाम जनता को क्या मिला के सवाल पर केंद्रित हो सकता है। सेवा संकल्प अभियान की सफलता का एक पैमाना यह भी होगा कि भाजपा का संगठन कितनी प्रभावी ढंग से इसे बूथ स्तर तक पहुंचाता है। पार्टी ने पहले ही चुनावी तैयारियों को बूथ और शक्ति केंद्र स्तर तक ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसलिए आने वाला एक महीना भाजपा के लिए कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जनसंपर्क की क्षमता और स्थानीय नेतृत्व की पकड़ परखने का अवसर भी है। जहां संगठन मजबूत है, वहां अभियान आसानी से जमीन पकड़ सकता है, जहां स्थानीय स्तर पर असंतोष या निष्क्रियता है, वहां वही अभियान पार्टी के लिए फीडबैक का माध्यम बन सकता है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो भाजपा ने सेवा को अपने जनसंपर्क अभियान का केंद्रीय शब्द बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से इसे जोड़ा गया है और उत्तराखंड में अभियान को विकसित भारत 2047 के संकल्प से जोड़ने की बात कही गई है। लेकिन चुनावी राजनीति में किसी अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता नारों से नहीं, जनता की प्रतिक्रिया से तय होती है। सेवा संकल्प अभियान के दौरान भाजपा के सामने यही सबसे महत्वपूर्ण फीडबैक होगा कि सरकार की उपलब्धियों का संदेश कितनी दूर तक पहुंचा और जमीन पर जनता किन सवालों को प्राथमिकता दे रही है। कुल मिलाकर, चुनावी साल में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान सरकार के कामकाज का प्रचार अभियान होने के साथ-साथ संगठन के लिए जनता की नब्ज टटोलने का अवसर भी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा इस जनसंपर्क से केवल अपनी उपलब्धियों की सूची तैयार करती है या जनता की शिकायतों और अपेक्षाओं को भी चुनावी रणनीति में जगह देती है। 2027 की राजनीतिक लड़ाई में यही फीडबैक आगे चलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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