शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
सैन्य बहुल राज्य का सियासी गणित
पूर्व सैनिकों और सैन्य परिवारों के वोटों को साधने के लिए 2027 चुनाव से पहले राजनीतिक बिसात बिछना शुरू
अग्निवीर पर सियासी संग्राम, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा,54 लाख आवेदनों को बनाया हथियार
सत्तारूढ़ दल का दावाकृयोजना के तहत आए रिकार्ड आवेदनों ने साबित किया युवाओं का भरोसा
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अग्निवीर योजना एक बार फिर सियासी विमर्श के केंद्र में आती दिख रही है। कांग्रेस लगातार अग्निपथ योजना को युवाओं के भविष्य और रोजगार से जोड़कर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस पर युवाओं को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि अग्निवीरों के लिए सेवा के बाद रोजगार और करियर का रोडमैप स्पष्ट है और बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा आवेदन किया जाना योजना में उनकी रुचि को दर्शाता है।
उत्तराखंड में सैन्य सेवा का सामाजिक और भावनात्मक महत्व लंबे समय से रहा है। बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती को करियर के साथ-साथ गौरव और सेवा का अवसर मानते हैं। ऐसे में अग्निपथ योजना का मुद्दा सीधे युवाओं और पूर्व सैनिक परिवारों से जुड़ता है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह वर्ग महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह है। यही कारण है कि अग्निवीर योजना अब केवल रक्षा भर्ती की नीति नहीं, बल्कि युवा रोजगार और भविष्य से जुड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। भाजपा ने अग्निपथ योजना के पक्ष में सबसे बड़ा राजनीतिक तर्क बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों को बनाया है। पार्टी का कहना है कि 54 लाख आवेदन इस बात का संकेत हैं कि देश के युवाओं में सेना में भर्ती होने को लेकर उत्साह और रुचि बनी हुई है।
भाजपा के मुताबिक यदि युवा योजना को पूरी तरह अस्वीकार करते, तो इतनी बड़ी संख्या में आवेदन नहीं आते। पार्टी इसे कांग्रेस के उस नैरेटिव का जवाब मान रही है जिसमें अग्निपथ योजना को युवाओं के लिए नुकसानदेह बताया जाता है। हालांकि आवेदन की संख्या को योजना के प्रति युवाओं की पूर्ण संतुष्टि का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। आवेदन यह जरूर बताते हैं कि सेना में भर्ती के प्रति आकर्षण कायम है, जबकि योजना के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के रोजगार और करियर के आंकड़ों से होगा। कांग्रेस का मुख्य राजनीतिक हमला अग्निवीर की चार वर्ष की सेवा अवधि को लेकर रहा है। पार्टी का तर्क है कि सेना में नियमित भर्ती की जगह सीमित अवधि की सेवा व्यवस्था से युवाओं के सामने चार साल बाद करियर को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है।
विपक्ष इस मुद्दे को बेरोजगारी से जोड़कर युवाओं के बीच ले जाने की कोशिश करता रहा है। कांग्रेस के लिए अग्निवीर योजना केंद्र सरकार की रोजगार नीति पर सवाल उठाने का माध्यम भी बन रही है। भाजपा का पलटवार है कि कांग्रेस युवाओं के सामने उपलब्ध अवसरों को नजरअंदाज कर केवल भ्रम का वातावरण बनाने का प्रयास कर रही है। अग्निपथ योजना पर भाजपा का बचाव केवल योजना के प्रावधानों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट हैकृसरकार सेना को युवा शक्ति से जोड़ रही है और अग्निवीरों को सेवा के बाद भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में पूर्व अग्निवीरों के लिए कांस्टेबल/राइफलमैन भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सरकार की ओर से किया गया है। कई राज्यों ने भी पुलिस और अन्य सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए अवसर या प्राथमिकता संबंधी फैसले लिए हैं। भाजपा इन्हीं प्रावधानों को अग्निवीरों के लिए तैयार किए गए रोडमैप के तौर पर प्रस्तुत कर रही है। उत्तराखंड के लिए अग्निवीर योजना का राजनीतिक महत्व दूसरे राज्यों की तुलना में अलग है। पहाड़ों में सेना की नौकरी को लेकर पीढ़ियों पुरानी परंपरा रही है। सेना में भर्ती यहां रोजगार के साथ सामाजिक प्रतिष्ठा और देशसेवा से भी जुड़ी रही है।
इसलिए कांग्रेस अगर अग्निवीर योजना को युवाओं के भविष्य का सवाल बनाती है तो भाजपा के लिए जरूरी होगा कि वह प्रदेश के युवाओं के बीच योजना के बाद के अवसरों को स्पष्ट रूप से रखे। वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह अपने आरोपों को ठोस आंकड़ों और अग्निवीरों की वास्तविक स्थिति से जोड़कर जनता के सामने रखे। 2027 की चुनावी राजनीति में अग्निवीर योजना पर बहस आगे और तेज हो सकती है। भाजपा इसे युवा शक्ति, राष्ट्र सेवा और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ सकती है, जबकि कांग्रेस इसे स्थायी रोजगार और युवाओं के भविष्य के सवाल के रूप में उठाएगी।
इस राजनीतिक टकराव में 54 लाख आवेदनों का आंकड़ा भाजपा के लिए बड़ा प्रचार बिंदु है, लेकिन चुनावी विमर्श में इससे आगे भी सवाल खड़े होंगेकृचार साल बाद अग्निवीरों का करियर कैसा रहा, कितनों को स्थायी रोजगार मिला और पुनर्वास की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित हुई? यानी अग्निवीर पर चुनावी सियासत में फिलहाल दो नैरेटिव आमने-सामने हैंकृभाजपा का युवाओं का उत्साह और अवसर बनाम कांग्रेस का भविष्य की सुरक्षा और स्थायी रोजगार। आने वाले चुनावी महीनों में इन दोनों दावों की असली परीक्षा युवाओं के बीच होने वाली राजनीतिक बहस और उपलब्ध आंकड़ों से होगी।
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