शनिवार, 12 सितंबर 2026
कांग्रेस को लगा ‘सियासी’ नेत्र रोग
विकास दिखता तो दुष्प्रचार की जरूरत नहीं पड़ती
भाजपा का पलटवार-जमीन पर चहुंमुखी विकास
कांग्रेस को उपलब्धियां नजर नहीं आ रहीं आजकल
सुविधाएं पहुंचाने को बताया सरकार का मूल मंत्र
देहरादून। कांग्रेस के लगातार सरकार पर हमलावर होने के बीच भाजपा ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को अब राजनीतिक नेत्र रोग हो गया है। यही वजह है कि उसे जमीन पर दिखाई दे रहा चहुंमुखी विकास नजर नहीं आ रहा। भाजपा के अनुसार प्रदेश में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, कनेक्टिविटी, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, पर्यटन और आधारभूत ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में लगातार काम हो रहा है, लेकिन कांग्रेस इन उपलब्धियों को देखने के बजाय राजनीतिक चश्मे से केवल कमियां तलाशने में जुटी है।
भाजपा का कहना है कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है, लेकिन सवाल और दुष्प्रचार में अंतर होता है। कांग्रेस यदि सरकार के कामकाज पर तथ्य आधारित सवाल उठाती है तो सरकार उसका जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन हर विकास कार्य को नकारना और हर उपलब्धि में राजनीति तलाशना जनता को गुमराह करने की कोशिश है। भाजपा का दावा है कि वह कांग्रेस की इस रणनीति का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि अपनी विकास की लकीर को और लंबा करके देगी।
भाजपा ने अपने राजनीतिक नैरेटिव के केंद्र में समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को रखा है। पार्टी का कहना है कि विकास का वास्तविक पैमाना केवल बड़े प्रोजेक्ट और चमकती सड़कें नहीं हैं, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उस व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं, जिसके पास संसाधन सबसे कम हैं। भाजपा के अनुसार गरीब, किसान, महिला, युवा, बुजुर्ग और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सुविधाओं और योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का जोर है। पार्टी इसे महज चुनावी घोषणा नहीं बल्कि शासन की कार्यशैली का हिस्सा बता रही है।
भाजपा का सीधा आरोप है कि कांग्रेस विकास के सवाल को राजनीतिक संघर्ष में बदलने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष को प्रदेश में हो रहे काम दिखाई देने चाहिए, लेकिन कांग्रेस का पूरा फोकस सरकार की आलोचना पर है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि यदि विपक्ष सरकार की किसी योजना में कमी बताता है तो उस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन हर काम को नकार देना प्रदेश की जनता के साथ भी अन्याय है। पार्टी का कहना है कि जनता अब दावों से अधिक काम को देख रही है और आने वाले समय में वही राजनीतिक फैसला करेगी।
हालांकि कांग्रेस सरकार के इन दावों को स्वीकार करने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, भर्ती परीक्षाओं, कानून-व्यवस्था, मूल निवास और भू-कानून जैसे मुद्दों पर सरकार को लगातार घेर रही है। विपक्ष का तर्क है कि केवल योजनाओं की घोषणा और बड़े विकास प्रोजेक्टों से जनता की समस्याएं खत्म नहीं होतीं। ऐसे में भाजपा का चहुंमुखी विकास वाला दावा कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती है तो कांग्रेस के लगातार सवाल भाजपा के लिए जवाबदेही की कसौटी।
यही वजह है कि उत्तराखंड की सियासत अब एक दिलचस्प मुकाम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। एक तरफ भाजपा विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस सरकार के दावों की जमीन पर पड़ताल करने और कमियां गिनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। भाजपा का संकेत साफ है कि वह कांग्रेस के हर आरोप का जवाब देने में अपनी राजनीतिक ऊर्जा खर्च करने के बजाय विकास को अपना मुख्य चुनावी हथियार बनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि चुनावी राजनीति में सबसे प्रभावी जवाब वही है, जिसे जनता अपनी आंखों से देख सके और अपने जीवन में महसूस कर सके।
इसी सोच के तहत भाजपा कांग्रेस के आरोपों को दुष्प्रचार बताते हुए अपनी उपलब्धियों को गांव, गरीब और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। पार्टी का दावा है कि उसकी राजनीति का लक्ष्य विपक्ष की लकीर छोटी करना नहीं, बल्कि अपनी लकीर इतनी बड़ी करना है कि विरोधियों के आरोप उसके सामने बौने साबित हों। सियासी संदेश साफ है- कांग्रेस जहां सरकार के काम पर सवालों की रोशनी डाल रही है, वहीं भाजपा जनता के बीच विकास के कामों की तस्वीर लेकर जाने की तैयारी में है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि 2027 की चुनावी चौखट पर जनता को किसकी तस्वीर ज्यादा साफ दिखाई देती है कि विपक्ष के सवालों की या सत्ता के विकास दावों की।
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