बुधवार, 23 सितंबर 2026
सियासी जंग की ‘नई फाइल’
उत्तराखंड की सियासत
विकास के दावों से दाग तक सिमट रही है अब जंग
दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपना हिसाब देखे
2027 से पहले आरोपों की सियासत ने पकड़ा जोर
किसके दामन में कितने दाग के सवाल तक पहुंचा
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 का चुनाव अभी सामने नहीं आया, लेकिन सियासी बारूद बिछना शुरू हो गया है। कांग्रेस सरकार पर सवाल दाग रही है और भाजपा अब सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस के राजनीतिक अतीत की फाइलें खोलने में जुट गई है। इसी क्रम में भाजपा ने कांग्रेस पर ऐसा तंज कसा है, जिसने सियासी बहस को सरकार के कामकाज से उठाकर किसके दामन में कितने दाग के सवाल तक पहुंचा दिया है। भाजपा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि लगता है कांग्रेस नेता अपने ही ऊपर लगे आरोपों की चार्जशीट लेकर घूम रहे हैं।
एक लाइन का यह तंज दरअसल 2027 की राजनीति की बदलती भाषा का संकेत है। कांग्रेस सरकार से हिसाब मांग रही है तो भाजपा पलटकर कांग्रेस से उसके पुराने हिसाब का जवाब मांग रही है। यानी चुनावी मैदान में अब आरोपों की फाइल बनाम उपलब्धियों की फाइल खुलने लगी है। कांग्रेस की ओर से सरकार पर लगातार कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। रोजगार, भर्ती, महंगाई, पलायन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेर रहा है। भाजपा का जवाब हैकृसिर्फ सरकार पर उंगली उठाने से राजनीति की जवाबदेही पूरी नहीं होती। विपक्ष को अपने नेताओं और अपने कार्यकाल से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए। यानी भाजपा ने कांग्रेस के हमले की दिशा बदलने की कोशिश की है। सवाल सरकार से था, जवाब कांग्रेस के अतीत की तरफ मोड़ दिया गया।
राजनीतिक दल चुनाव से पहले जनता के सामने अपनी-अपनी कहानी रखने की तैयारी में हैं। भाजपा अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को मुद्दा बनाएगी, जबकि कांग्रेस सरकार की कमियों और जनता से जुड़े सवालों को केंद्र में रखने की कोशिश करेगी। लेकिन भाजपा के ताजा हमले से साफ है कि चुनावी मुकाबला केवल विकास और योजनाओं तक सीमित रहने वाला नहीं है। पुराने विवाद, नेताओं के बयान और एक-दूसरे के कार्यकाल का रिकार्ड भी चुनावी हथियार बन सकता है। यही राजनीति का वह मोड़ है जहां सवाल बदलते देर नहीं लगती कि किसने क्या किया से लेकर किसने क्या किया था तक।
इस पूरी बहस का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष जनता के सवाल हैं। उत्तराखंड का युवा रोजगार और भर्ती चाहता है। पहाड़ पलायन और बुनियादी सुविधाओं का जवाब मांगता है। किसान, कर्मचारी, व्यापारी और आम परिवार अपनी-अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद करता है। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जितना तेज होगा, उतना ही बड़ा सवाल यह रहेगा कि क्या चुनावी बहस जनता के वास्तविक मुद्दों पर टिकेगी या फिर एक-दूसरे की राजनीतिक चार्जशीट पढ़ने में ही पूरा चुनाव निकल जाएगा?
भाजपा का चार्जशीट वाला तंज इस बात का संकेत है कि 2027 की लड़ाई में राजनीतिक हमले और धारदार होने वाले हैं। कांग्रेस सरकार के पांच साल का हिसाब मांगेगी तो भाजपा कांग्रेस के पुराने रिकार्ड का हिसाब सामने रखेगी। आगे यह टकराव किस स्तर तक जाएगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। फिलहाल दोनों दलों ने अपनी-अपनी राजनीतिक तलवारें निकाल ली हैं। अब मुकाबला सिर्फ कौन सही का नहीं, बल्कि कौन किसका हिसाब खोलता है का भी है और उत्तराखंड की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा।
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