गुरुवार, 24 सितंबर 2026
उत्तराखंड बीजेपी का नया नेतृत्व
विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारी के बीच बदली भाजपा की टीम
रण से पहले भाजपा ने बदली टीम, उत्तराखंड में राम माधव की एंट्री
दुष्यंत गौतम की विदाई, बांसुरी स्वराज व अरविंद मेनन बने सह-प्रभारी
चुनावी तैयारी के बीच संगठन में बदलाव के कई मायने तलाशे जा रहे
देहरादून। विधानसभा चुनाव-2027 की उल्टी गिनती के बीच भाजपा ने उत्तराखंड संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने लंबे समय से प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे दुष्यंत गौतम को हटाकर वरिष्ठ नेता राम माधव को उत्तराखंड का नया प्रभारी बनाया है। इसके साथ ही सांसद बांसुरी स्वराज और वरिष्ठ नेता अरविंद मेनन को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। भाजपा का यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक तैयारियां तेज हो चुकी हैं। लिहाजा नई प्रभारी टीम की तैनाती को केवल सामान्य संगठनात्मक फेरबदल के बजाय चुनावी तैयारियों के अगले चरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी ने नियुक्तियों के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
दुष्यंत गौतम करीब छह वर्ष तक उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी रहे। उनके कार्यकाल में पार्टी ने कई संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियां संचालित कीं। हालांकि, हाल के समय में उनके नाम को लेकर राज्य की राजनीति में विवाद भी सामने आए। विशेष रूप से अंकिता भंडारी प्रकरण से संबंधित सोशल मीडिया सामग्री को लेकर विवाद हुआ था। गौतम ने इन आरोपों को खारिज किया था और कानूनी कार्रवाई भी की थी। ऐसे में उनकी जगह बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन भाजपा ने आधिकारिक रूप से इसे विवादों से जोड़कर कोई कारण नहीं बताया है।
अब पार्टी ने राम माधव को उत्तराखंड की कमान सौंपी है। राम माधव भाजपा के वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं में रहे हैं और इससे पहले जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राजनीतिक-संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। अगस्त 2026 में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी। उत्तराखंड के साथ उन्हें तमिलनाडु की संगठनात्मक जिम्मेदारी भी दी गई है।
प्रभारी के साथ सह-प्रभारियों की टीम भी बदल दी गई है। बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को उत्तराखंड का सह-प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले रेखा वर्मा यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं। नई व्यवस्था में रेखा वर्मा को मध्य प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया गया है। बांसुरी स्वराज दिल्ली से भाजपा सांसद हैं और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। वहीं अरविंद मेनन लंबे समय से भाजपा के संगठनात्मक कामकाज से जुड़े रहे हैं। नई टीम में एक ओर वरिष्ठ संगठनात्मक अनुभव है तो दूसरी ओर राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े नए चेहरे को उत्तराखंड में जिम्मेदारी दी गई है।
2027 का चुनाव नई प्रभारी टीम के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगा। उसके सामने सरकार और संगठन के बीच समन्वय, बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को साधना और चुनावी मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाना जैसी चुनौतियां होंगी। इसके साथ ही टिकट वितरण से पहले पार्टी के भीतर दावेदारियों का दबाव भी बढ़ेगा। मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, स्थानीय संगठन की स्थिति, क्षेत्रीय समीकरण और संभावित प्रत्याशियों की स्वीकार्यता जैसे मुद्दे नई टीम के सामने होंगे।
उत्तराखंड में पहाड़ और मैदान की अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन के लिए क्षेत्रीय संतुलन भी महत्वपूर्ण होगा। गढ़वाल, कुमाऊं और मैदानी जिलों की राजनीतिक प्राथमिकताओं को एक चुनावी रणनीति में पिरोना नई टीम की अहम जिम्मेदारी होगी। भाजपा पहले ही संगठनात्मक बैठकों, बूथ स्तर की तैयारियों और जनसंपर्क गतिविधियों को तेज कर चुकी है। ऐसे समय में केंद्रीय नेतृत्व की नई टीम की तैनाती का अर्थ यह भी है कि चुनावी तैयारियों की निगरानी के लिए संगठन के शीर्ष स्तर से उत्तराखंड पर फोकस बढ़ा है।
अब देखना यह होगा कि राम माधव के नेतृत्व वाली नई टीम प्रदेश संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच किस तरह तालमेल बनाती है और आने वाले महीनों में भाजपा की चुनावी रणनीति किस रूप में सामने आती है। प्रभारी बदला है, सह-प्रभारी बदले हैंकृअब नजर इस पर होगी कि क्या भाजपा की चुनावी रणनीति भी उसी अनुपात में बदलेगी। 2027 के रण में संगठन की यह नई टीम कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है, इसका जवाब आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति देगी।
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