सोमवार, 7 सितंबर 2026
युवाओं पर भरोसा, तरीका न थोपेंः भागवत
लंदन में सेलिब्रेशन आफ वननेस कार्यक्रम में बोले संघ प्रमुख
युवाओं को लक्ष्य बताएं, तरीका तय करने की स्वतंत्रता दें
मतभेद छोड़ दुनिया बेहतर बनाने को तैयार है देश के युवा
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवा पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए कहा है कि आने वाली पीढ़ियां दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा रखती हैं और इस उद्देश्य के लिए अपने छोटे-छोटे मतभेदों को पीछे छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने युवाओं को पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार बताते हुए कहा कि उनमें सही बात को पहचानकर उस पर काम करने का साहस अधिक है।
लंदन में रविवार को स्थानीय समयानुसार सेलिब्रेशन आफ वननेस विषय पर आयोजित कम्युनिटी लीडर्स रिसेप्शन और सिविलाइजेशनल डायलॉग में भागवत ने कहा कि पुरानी पीढ़ियां अपने जीवन के अनुभवों और उनसे पैदा हुई आशंकाओं से अधिक प्रभावित रहती हैं। इसके कारण वह किसी कदम के संभावित परिणामों को लेकर ज्यादा सतर्क रहती हैं। इसके विपरीत युवा पीढ़ी इन आशंकाओं से कम बंधी होती है और जब उसे कोई बात सही लगती है तो उस पर आगे बढ़ने के लिए ज्यादा तैयार रहती है।
भागवत ने कहा कि बुजुर्ग पीढ़ी को युवाओं के सामने लक्ष्य स्पष्ट करना चाहिए, लेकिन उस लक्ष्य तक पहुंचने का तरीका उन पर नहीं थोपना चाहिए। युवाओं को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन देकर उन्हें अपना रास्ता तलाशने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह युवा पीढ़ी अपने उद्देश्य को अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से हासिल कर सकती है।
संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में समाज और दुनिया में एकता के लिए उन बातों पर जोर देने की आवश्यकता बताई जो लोगों को जोड़ती हैं। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने की बात भी कही। सेलिब्रेशन आफ वननेस कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय चिंतन की उस परंपरा का उल्लेख किया जिसमें अलग-अलग विचारों और रास्तों के बावजूद एकता की भावना को महत्व दिया जाता है।
भागवत का युवा पीढ़ी को लेकर यह भरोसा उनके हालिया वक्तव्यों की कड़ी में देखा जा रहा है। इससे पहले भी उन्होंने युवाओं और विशेष रूप से जेन-जी को लेकर सकारात्मक रुख व्यक्त किया था। लंदन में उनका संदेश रहा कि नई पीढ़ी को केवल निर्देश देने के बजाय उस पर विश्वास करना और उसे अपने तरीके से समाधान खोजने का अवसर देना चाहिए।
लंदन में आयोजित कार्यक्रम हिंदू स्वयंसेवक संघ यूके की पहल और इंटीग्रल के सहयोग से हुआ। संघ के अनुसार, इसमें ब्रिटेन की 310 से अधिक सामुदायिक संस्थाओं और संगठनों के शामिल होने की अपेक्षा थी। भागवत के ब्रिटेन दौरे के दौरान उन्होंने धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों और भारतीय मूल के समुदाय से जुड़े लोगों से भी संवाद किया।
संघ के मुताबिक लंदन कार्यक्रम में सामाजिक सद्भाव, सेवा और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर भी जोर दिया गया। भागवत ने विविधताओं को स्वीकार करते हुए समाज को उन मूल्यों पर आगे बढ़ाने की बात रखी जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं।
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