गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
कल तक ‘तेवर तल्ख’ आज घुटने पर ‘हरदा’
पूर्व सीएम हरीश रावत के समानांतर शक्ति प्रदर्शन पर लगा ब्रेक
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस
पूर्व सीएम हरीश रावत की नौ धन्यवाद यात्राएं फिलहाल स्थगित
कांग्रेस के भीतर संगठन बनाम व्यक्तिगत अभियान की बहस तेज
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल हाईकमान की हिदायत के बाद थमता दिखाई दे रहा है। रावत ने अपनी आगे प्रस्तावित नौ धन्यवाद यात्राएं स्थगित करने का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि इन यात्राओं की तैयारियों और आयोजन की जिम्मेदारी उन्होंने संबंधित लोगों को सौंप दी थी, लेकिन अब उन्हें स्थगित करना पड़ रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस संगठन को एकजुट होकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। पार्टी हाईकमान ने रावत के व्यक्तिगत कार्यक्रमों को लेकर आपत्ति जताई थी और संगठन द्वारा तय सामूहिक कार्यक्रमों पर जोर दिया था। कांग्रेस महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने पहले रावत को पत्र लिखकर यात्रा को रोकने की सलाह दी थी। पार्टी नेतृत्व की ओर से इसे संगठन के समानांतर कार्यक्रम के रूप में देखे जाने की बात सामने आई थी।
हाईकमान की हिदायत के बावजूद रावत ने पांच अक्टूबर को जसपुर से हल्द्वानी तक यात्रा का कार्यक्रम आगे बढ़ाया था। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को संदेश दिया था कि चुनौती बड़ी है और उत्तराखंड के स्वाभिमान तथा बदलाव के लिए रुकना नहीं है। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने व्यक्तिगत अभियानों को लेकर अपना रुख और स्पष्ट किया। अब रावत के नौ प्रस्तावित कार्यक्रमों को स्थगित करने के फैसले को पार्टी नेतृत्व के साथ टकराव को फिलहाल टालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, रावत ने अपनी पोस्ट में यात्राओं के पीछे की मंशा को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। इससे संकेत मिलता है कि यात्रा का मुद्दा केवल कार्यक्रम स्थगित होने तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस में संगठनात्मक भूमिका और वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक सक्रियता को लेकर व्यापक बहस से जुड़ा है।
रावत की यात्रा शुरू होने के बाद कांग्रेस के भीतर संगठन और व्यक्तिगत जनसंपर्क कार्यक्रमों को लेकर मतभेद सामने आए। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले सभी वरिष्ठ नेता साझा मंच और संगठन के निर्धारित कार्यक्रमों के तहत जनता के बीच जाएं। दूसरी ओर रावत के समर्थकों का कहना रहा है कि उनका अभियान कांग्रेस को मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने के उद्देश्य से था। यही अंतर 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। एक तरफ पार्टी को अनुभवी नेताओं के जनाधार और सक्रियता का इस्तेमाल करना है, तो दूसरी तरफ संगठनात्मक अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था भी बनाए रखनी है।
रावत की नौ यात्राओं का स्थगन भले ही तत्काल विवाद को विराम देता हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और चुनावी अभियान के संचालन से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। हाईकमान का स्पष्ट संदेश है कि आगामी चुनाव में व्यक्तिगत अभियानों के बजाय पार्टी के सामूहिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि रावत और हाईकमान के बीच आगे होने वाली बातचीत के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और चुनावी अभियान में उनकी भागीदारी किस रूप में तय होती है। नौ यात्राओं का स्थगन फिलहाल विवाद पर विराम है, लेकिन रावत की सक्रियता और कांग्रेस के सामूहिक नेतृत्व के बीच संतुलन का सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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