रविवार, 11 अक्टूबर 2026

महिला सम्मान पर कांग्रेस का दोहरा चेहरा

बड़ी-बड़ी बातें करने वाली कांग्रेस अपने नेताओं पर लगे आरोपों पर क्यों है खामोश भाजपा ने राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व को घेरा, जवाबदेही तय करने की उठाई मांग देहरादून। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के सवाल पर राजनीति करने वाली कांग्रेस अब खुद भाजपा के निशाने पर है। महिलाओं के अधिकार, समानता और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ आवाज उठाने वाली कांग्रेस पर भाजपा ने दोहरे रवैये का आरोप लगाया है। भाजपा का सवाल है कि जब महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात आती है, तब कांग्रेस विरोधियों को कठघरे में खड़ा करने में देर नहीं करती, लेकिन जब आरोप उसकी अपनी पार्टी के नेताओं से जुड़े हों, तो नेतृत्व की आवाज कमजोर क्यों पड़ जाती है? महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस की कथनी और करनी के बीच अंतर को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। यह विवाद उस समय और तेज हुआ है, जब भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन कर पार्टी नेतृत्व से महिलाओं से जुड़े आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। भाजपा ने कांग्रेस पर महिला सम्मान को राजनीतिक सुविधा के हिसाब से देखने का आरोप लगाया है। भाजपा का हमला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिला सुरक्षा संबंधी बयानों और पार्टी के भीतर महिलाओं से जुड़े विवादों पर नेतृत्व की प्रतिक्रिया को लेकर केंद्रित है। भाजपा महिला मोर्चा की नेताओं ने सवाल उठाया है कि महिलाओं को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करने वाले राहुल गांधी अपनी पार्टी से जुड़े गंभीर आरोपों पर स्पष्ट जवाब क्यों नहीं देते? भाजपा की हिमाचल प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष दैजी ठाकुर ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया कि कांग्रेस महिला सम्मान की बात तो करती है, लेकिन अपनी पार्टी से जुड़े मामलों में उसका रवैया अलग दिखाई देता है। उन्होंने महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई और पार्टी नेतृत्व की जवाबदेही तय करने की मांग की। भाजपा का तर्क है कि महिला सशक्तीकरण केवल मंचों से भाषण देने, नारे लगाने और राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाने से साबित नहीं होता। इसकी असली परीक्षा तब होती है, जब किसी महिला की शिकायत अपनी पार्टी, अपने संगठन या अपने प्रभावशाली नेताओं से जुड़ी हो। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और स्पष्ट कार्रवाई की मांग करना ही महिला सम्मान के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। भाजपा ने दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी कांग्रेस के खिलाफ अपने हमले का आधार बनाया है। आठ अक्टूबर को भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के व्यवहार पर सवाल उठाए और कांग्रेस के महिला सम्मान संबंधी नारों पर निशाना साधा। भाजपा ने इस प्रकरण को महिला सुरक्षा पर कांग्रेस के दावों से जोड़ते हुए सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की। हालांकि, इस घटनाक्रम में लगाए गए आरोपों और उनकी स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्यात्मक स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है। राजनीतिक आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं हैं। फिर भी, भाजपा इस विवाद को कांग्रेस की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रही है। महिला सुरक्षा का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। महिलाओं के खिलाफ अपराध, उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों में सरकार, विपक्ष, राजनीतिक संगठनों और संस्थानोंकृसभी की जवाबदेही होनी चाहिए। किसी भी महिला की शिकायत को राजनीतिक पहचान के आधार पर कमतर नहीं आंका जा सकता। भाजपा कांग्रेस से जिन सवालों के जवाब मांग रही है, उनका राजनीतिक महत्व अपनी जगह है। लेकिन यही कसौटी भाजपा सहित सभी दलों पर भी लागू होनी चाहिए। यदि किसी नेता पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो निष्पक्ष जांच, पीड़ित की गरिमा की रक्षा और कानून के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। महिला सुरक्षा को दलगत राजनीति से ऊपर रखने का अर्थ भी यही है। कांग्रेस के सामने चुनौती केवल भाजपा के आरोपों का जवाब देने की नहीं है। उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मामले में उसके संगठनात्मक मानदंड क्या हैं और शिकायतें सामने आने पर वह किस तरह जवाबदेही सुनिश्चित करती है। दूसरी ओर, भाजपा को भी यह दिखाना होगा कि महिला सम्मान के सवाल पर उसका रुख राजनीतिक विरोधियों तक सीमित नहीं, बल्कि सभी मामलों में समान है। महिला सुरक्षा का सवाल उत्तराखंड समेत पूरे देश की राजनीति में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दल महिलाओं के समर्थन को अपनी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानते हैं। ऐसे में एक-दूसरे पर महिला विरोधी रवैये का आरोप लगाना आसान है, लेकिन जनता के सामने अपनी प्रतिबद्धता साबित करना कठिन। भाजपा कांग्रेस के इस विवाद को चुनावी विमर्श में भुनाने की कोशिश कर सकती है। उसका संदेश होगा कि महिला सम्मान की बात करने वाले दलों को पहले अपने संगठन के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। कांग्रेस के लिए जरूरी होगा कि वह इन आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब दे और महिला सुरक्षा पर अपनी नीति तथा व्यवहार के बीच सामंजस्य दिखाए। महिला सम्मान कोई चुनावी नारा नहीं, सामाजिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। किसी भी दल की असली परीक्षा उसके भाषणों से नहीं, बल्कि महिलाओं की शिकायतों पर उसके व्यवहार से होती है। कांग्रेस पर भाजपा के आरोप राजनीतिक हैं, लेकिन उनसे उठा जवाबदेही का सवाल महत्वपूर्ण है। इस सवाल का उत्तर केवल बयानबाजी से नहीं, निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और कार्रवाई से ही दिया जा सकता है।

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