रविवार, 18 अक्टूबर 2026
अंकिता प्रकरण में फिर ‘हुंकार’
इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन मार्च का आह्वान
दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से तत्काल हटाएं
कथित वीआईपी प्रकरण की हो निष्पक्ष जांच
उत्तराखंडवासियों से एकजुट होने की अपील की
नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग अब उत्तराखंड से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी आवाज बुलंद कर रही है। अंकिता को न्याय दिलाने और हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी प्रकरण पर उठ रहे सवालों के जवाब मांगने के लिए इंडिया गेट पर जुटे लोगों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में रह रहे उत्तराखंडवासियों और आम नागरिकों से एकजुट होकर इस मुहिम में शामिल होने की अपील की है।
प्रदर्शनकारियों ने इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन की ओर विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को व्यापक स्तर पर उठाने और मामले से जुड़े सवालों पर जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए जनसमर्थन जरूरी है। इस अभियान को उत्तराखंड के स्वाभिमान और न्याय की लड़ाई बताते हुए लोगों से बड़ी संख्या में जुड़ने की अपील की गई है। अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड में लंबे समय से संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। मामले में तीन दोषियों को अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के कारण विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोग इस प्रकरण को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड के लोगों से इस अभियान में भाग लेने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग किसी एक राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसे महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब किसी मामले को लेकर पीड़ित परिवार और समाज के एक वर्ग की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हों, तो उन सवालों का समाधान तथ्यों और निष्पक्ष जांच के माध्यम से किया जाना चाहिए। उनका जोर है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल हो और किसी भी सवाल को अनसुना न किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने और उनके संबंध में उठाए जा रहे सवालों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि कथित वीआईपी प्रकरण को लेकर जनता के मन में उठ रहे सवालों का पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि संवैधानिक पद पर नियुक्ति के बाद जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो और जांच के निष्कर्षों को लेकर स्पष्टता सामने आए।
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बना है। विपक्ष और आंदोलन से जुड़े लोग इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि या निर्दाेषता का फैसला राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि साक्ष्यों और कानून के अनुसार ही होना चाहिए। प्रदर्शन में मौजूद ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल ने अंकिता भंडारी को न्याय और जनचेतना का प्रतीक बताते हुए दिल्ली में रहने वाले उत्तराखंडवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से उठाने के लिए एकजुट हों।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंकिता प्रकरण ने उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया है। ऐसे में इस मामले को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय जांच की पारदर्शिता और पीड़ित परिवार की अपेक्षाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ लोगों की शंकाओं का समाधान करना भी महत्वपूर्ण है। जब तक कथित वीआईपी से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस जारी रहने की संभावना है।
मोहित इमरी ने अंकिता के लिए न्याय की मांग को उत्तराखंड के स्वाभिमान से जोड़ते हुए लोगों से आगे आने की अपील की। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और समाज में न्याय के प्रति विश्वास कायम रखने का सवाल भी है। प्रदर्शनकारियों ने लोगों से आग्रह किया कि वह इस अभियान को किसी दलगत राजनीति के बजाय न्याय की मांग के रूप में देखें। उनका कहना है कि जांच से जुड़े सवालों का जवाब सामने आना चाहिए और मामले में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन की ओर प्रस्तावित मार्च के आह्वान के बाद अब इस बात पर नजर रहेगी कि कितने लोग इसमें शामिल होते हैं और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च के लिए संबंधित प्रशासनिक अनुमति और लागू प्रतिबंधों की स्थिति स्पष्ट होना भी महत्वपूर्ण होगा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाना, कथित वीआईपी प्रकरण की निष्पक्ष जांच और अंकिता को न्याय दिलाने की मुहिम को व्यापक जनसमर्थन दिलाना शामिल है। दिल्ली में प्रस्तावित यह कार्यक्रम अंकिता प्रकरण को लेकर जारी जनभावनाओं और राजनीतिक बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी में सामने ला सकता है।
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