गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

मदरसों की छुट्टी पर सियासत

जुमे की जगह रविवार को अवकाश के फैसले पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस 2027 के चुनाव से पहले ध्रुवीकरण बनाम तुष्टीकरण की राजनीति ने पकड़ा जोर दोनों दलों के बीच तुष्टीकरण और समान नियमों की सियासी जंग हो गई है तेज देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच मदरसों में शुक्रवार की साप्ताहिक छुट्टी खत्म कर रविवार को अवकाश करने के फैसले ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस ने इसे चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया है। कांग्रेस की आपत्तियों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए उसके मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति पर सवाल खड़े किए हैं। अब लड़ाई केवल मदरसों की छुट्टी तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि इसके बहाने दोनों दलों के बीच तुष्टीकरण और समान नियमों की सियासी जंग तेज हो गई है। मदरसों में शुक्रवार की छुट्टी समाप्त करने के फैसले पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने सरकार को घेरा है। उनका आरोप है कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा मदरसा, मस्जिद और मजार जैसे मुद्दों को उठाकर ध्रुवीकरण की राजनीति करने लगती है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं, सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता पर सरकार उतना ध्यान क्यों नहीं देती। कांग्रेस की इस आपत्ति को भाजपा ने उसके मुस्लिम वोट बैंक से जोड़ दिया है। भाजपा विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने पलटवार करते हुए कहा कि मदरसे अब शिक्षा विभाग के नियमों के तहत मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान हैं। ऐसे में उनके लिए अलग साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान क्यों होना चाहिए? भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस समान व्यवस्था के फैसले पर भी राजनीतिक आपत्ति जता रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि प्रदेश में सभी के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए और शिक्षण संस्थानों को भी समान दिशा में काम करना चाहिए। सरकार का तर्क है कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों को दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों की तरह निर्धारित नियमों और शैक्षणिक व्यवस्था का पालन करना होगा। इसी के तहत शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश लागू किया जा रहा है। यह व्यवस्था शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों के साथ मान्यता के लिए आवेदन कर चुके संस्थानों पर भी लागू होगी। अधिकारियों के मुताबिक, 76 मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता मिल चुकी है, जबकि 114 आवेदन प्रक्रिया में हैं। ऐसे में सरकार का फैसला केवल छुट्टी के दिन में बदलाव नहीं, बल्कि मदरसों को नई नियामक व्यवस्था के तहत लाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा भी है। इस विवाद ने भाजपा और कांग्रेस के पुराने राजनीतिक टकराव को फिर हवा दे दी है। भाजपा कांग्रेस की आपत्तियों को मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति बताकर पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस सरकार के फैसले को चुनावी ध्रुवीकरण से जोड़ रही है। दोनों दलों के आरोपों के बीच असल सवाल यह है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लागू करने का फैसला स्पष्ट और समान नियमों पर आधारित है और क्या सरकार इसे राजनीतिक बयानबाजी से अलग रख पाएगी? भाजपा के लिए यह मुद्दा समान नियमों और प्रशासनिक सुधार के अपने तर्क को सामने रखने का अवसर है। वहीं कांग्रेस इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। लेकिन केवल छुट्टी के दिन को लेकर विरोध या समर्थन से किसी दल की पूरी मंशा तय नहीं की जा सकती। फैसले की जरूरत, उसके क्रियान्वयन और विद्यार्थियों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन भी जरूरी है। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला तेज हो रहा है। मदरसों की छुट्टी का मुद्दा भी इसी व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा इसे समान व्यवस्था के नजरिये से देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे धार्मिक पहचान से जुड़े विषयों पर सरकार की राजनीति बता रही है। हालांकि, इस विवाद का चुनावी असर कितना होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। मतदाताओं के लिए शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार, महंगाई और स्थानीय समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में दोनों दलों को केवल आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर अपने तर्कों और नीतियों की प्रभावशीलता साबित करनी होगी। फिलहाल, शुक्रवार की छुट्टी से शुरू हुआ विवाद भाजपा बनाम कांग्रेस की सियासी लड़ाई में बदल गया है। भाजपा कांग्रेस के मुस्लिम प्रेम पर सवाल उठा रही है, तो कांग्रेस सरकार पर ध्रुवीकरण का आरोप लगा रही है। चुनावी वर्ष में यह टकराव आगे और तीखा हो सकता है। मगर अंतिम कसौटी यही होगी कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव से विद्यार्थियों को कितना लाभ मिलता है और सरकार अपने फैसले को कितनी पारदर्शिता के साथ लागू करती है।

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