गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026
‘फर्जी वोटरों’ के मोह में विरोध
मतदाता सूची साफ करने की संवैधानिक कवायद पर है ऐतराजकृ
हार पची नहीं, तो निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की साख पर लगा रहे दाग
जनता का भरोसा खोकर अब पूरी व्यवस्था पर दाग लगाने का खेल
देश की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाने में जुटी है कांग्रेस पार्टी
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल खड़े कर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि चुनावी राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर पाने के बाद कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं और निर्वाचन प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति अपना रही है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने कांग्रेस के एसआईआर के विरोध को इसी राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी संवैधानिक प्रक्रिया का विरोध केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि उससे राजनीतिक नुकसान की आशंका हो। पार्टी का तर्क है कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी आवश्यकता है।
भाजपा नेताओं के अनुसार कांग्रेस को यदि मतदाता सूची में किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो उसके लिए निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। आपत्तियों और दावों को उचित मंच पर उठाने के बजाय सार्वजनिक तौर पर निर्वाचन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है। उत्तराखंड में एसआईआर के बाद मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं। भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित बता रही है। भाजपा का कहना है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटा है तो विशेष अभियान और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे जोड़ने का रास्ता खुला है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को ही संदिग्ध बताना उचित नहीं है।
भाजपा ने कांग्रेस से सवाल किया है कि चुनावी प्रक्रिया में खामियां हैं तो वह उनके प्रमाण निर्वाचन आयोग के सामने क्यों नहीं रखती। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से पहले ठोस तथ्यों को सामने रखना जरूरी है। वहीं कांग्रेस की ओर से एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों का आधार मतदाता अधिकार और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए और पुनरीक्षण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस राजनीतिक टकराव ने उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। भाजपा जहां कांग्रेस के विरोध को चुनावी हार की आशंका और राजनीतिक निराशा से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे मतदाता अधिकारों की रक्षा का सवाल बता रही है। चुनावी मैदान में यह मुद्दा आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया मोर्चा बन सकता है।
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