शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
कांग्रेस की सियासत को बताया ‘गिद्ध राजनीति’
भाजपा का राहुल गांधी पर राजनीतिक पाखंड का वार
यौन शोषण के आरोपी करीबी को लेकर उठाए सवाल
मुजफ्फरनगर कांड की याद दिलाकर कांग्रेस को घेरा
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड पर उत्तराखंड में सियासी संग्राम लगातार तीखा होता जा रहा है। कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों और कथित वीआईपी कोण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने विपक्ष पर ऐसा हमला बोला है, जिसने राजनीतिक टकराव को और हवा दे दी है। उनियाल ने अंकिता के नाम पर कांग्रेस की सक्रियता को ‘गिद्ध राजनीति’ करार देते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक पाखंड का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेतृत्व अपने करीबी पर लगे यौन शोषण के आरोपों को लेकर वैसी ही मुखरता क्यों नहीं दिखाता, जैसी अंकिता प्रकरण में दिखाई जा रही है।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस को अंकिता के परिवार के न्याय से ज्यादा इस संवेदनशील मामले से राजनीतिक लाभ हासिल करने की चिंता है। मंत्री के बयान का सीधा संदेश है कि महिला सम्मान की बात करने वाले कांग्रेस नेताओं को पहले अपने राजनीतिक आचरण और करीबियों से जुड़े गंभीर आरोपों पर भी जवाब देना चाहिए। सुबोध उनियाल ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अपने करीबी यौन शोषण के आरोपी प्रोफेसर-सांसद के मामले में सवालों का सामना करने से बचता है, लेकिन अंकिता भंडारी के नाम पर राजनीतिक सक्रियता दिखाने में पीछे नहीं रहता। उन्होंने इस रवैये को राजनीतिक पाखंड बताते हुए कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए।
उनियाल का हमला ऐसे समय आया है, जब अंकिता के माता-पिता के दिल्ली में प्रदर्शन और विपक्षी नेताओं के समर्थन के बाद मामला फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में है। भाजपा इस आंदोलन को कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस कथित वीआईपी कोण पर जवाबदेही की मांग कर रही है। राजनीतिक सवाल अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति पर लगे आरोपों का निर्धारण प्रमाणों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए। कांग्रेस की मंशा पर भाजपा के आरोपों से अलग, अंकिता प्रकरण में उठ रहे सवालों का तथ्यपरक जवाब भी जरूरी है।
सुबोध उनियाल ने कांग्रेस पर हमला करते हुए मुजफ्फरनगर कांड का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान देवभूमि की मातृशक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं के इतिहास के बावजूद कांग्रेस आज महिला सम्मान के सवाल पर राजनीतिक उपदेश दे रही है। भाजपा इस मुद्दे के जरिये कांग्रेस को उसके राजनीतिक अतीत के कठघरे में खड़ा करना चाहती है। पार्टी का तर्क है कि महिला सम्मान पर राजनीति करने वाले दलों को अपने पुराने रिकार्ड पर भी जवाब देना चाहिए। इस बयान से अंकिता प्रकरण पर जारी लड़ाई अब वर्तमान सरकार की जवाबदेही से आगे बढ़कर राजनीतिक दलों के अतीत और वर्तमान के आचरण की बहस में तब्दील होती दिखाई दे रही है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन आरोपियों को अदालत आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। इसके बावजूद कथित वीआईपी कोण को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस इसी मुद्दे पर सरकार को घेर रही है, जबकि भाजपा विपक्ष पर दिवंगत बेटी के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है। यही वह मोर्चा है, जहां दोनों पक्षों के दावों की कसौटी तथ्यों से तय होगी। दोषियों को सजा मिलना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण परिणाम है, लेकिन कथित वीआईपी कोण पर उठ रहे सवालों का जवाब केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं दिया जा सकता। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए।
विधानसभा चुनाव से पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिष्ठा का मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है, तो भाजपा कांग्रेस के दोहरे रवैये और कथित राजनीतिक अवसरवाद को निशाना बना रही है। सुबोध उनियाल के बयान ने इस टकराव को और आक्रामक बना दिया है। अब भाजपा का हमला केवल कांग्रेस के आंदोलन पर नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक चरित्र और महिला सम्मान पर उसके दावों पर भी है। लेकिन इस सियासी शोर के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंकिता के नाम पर आरोपों की जंग कब खत्म होगी और परिवार को उठ रहे सवालों पर स्पष्ट जवाब कब मिलेगा? देवभूमि की जनता को राजनीतिक विशेषणों से ज्यादा निष्पक्षता, पारदर्शिता और न्याय से जुड़े ठोस तथ्यों की दरकार है।
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