शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

जनता के ‘आशीर्वाद’ की तलाश में भाजपा

भाजपा ने बनाई बूथ से घर तक पहुंचने की रणनीति संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद तेज की संगठनात्मक कार्यक्रमों में इसका खाका किया तैयार देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी की रणनीति अब केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, कमजोर सीटों पर पकड़ मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर है। हाल के संगठनात्मक कार्यक्रमों में इसका खाका सामने आया है। भाजपा के सामने 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए पार्टी ने जमीनी संगठन को अपनी रणनीति का मुख्य आधार बनाया है। अगस्त-सितंबर के लिए जारी कार्यक्रमों में बूथ सशक्तीकरण, शक्ति केंद्रों की बैठकें, मतदाता संपर्क और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संवाद को प्राथमिकता दी गई। पार्टी की कोशिश हर बूथ और हर घर तक संगठन की पहुंच बढ़ाने की है। भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पिछली विधानसभा में हारी 23 सीटें हैं। इन क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के प्रवास, रात्रि विश्राम, बूथ संवाद तथा स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों से संपर्क जैसे कार्यक्रम किए गए। पार्टी इन सीटों पर पिछली हार के कारणों को समझने और संगठनात्मक कमियों को दूर करने की कोशिश कर रही है। वहीं जीती हुई सीटों को सुरक्षित रखना भी रणनीति का अहम हिस्सा है। पार्टी ने मौजूदा विधायकों को अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने, सरकार के काम जनता तक पहुंचाने और स्थानीय समस्याओं के समाधान पर जोर देने का संदेश दिया है। प्रत्याशी चयन में क्षेत्रीय सक्रियता, संगठन के फीडबैक और सर्वे को आधार बनाए जाने की बात भी सामने आई है। 2027 की चुनावी रणनीति में युवा मतदाताओं को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व की बैठकों में पहली बार मतदान करने वाले और 18 से 29 वर्ष के युवाओं तक पहुंच बढ़ाने, महाविद्यालय संपर्क, डिजिटल संवाद और युवा कार्यक्रमों पर चर्चा हुई है। इसके साथ ही भाजपा ने ओबीसी समाज के बीच संपर्क अभियान को भी गति दी है। घर-घर प्रवास, समाजवार संवाद और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से संपर्क के कार्यक्रम इसके हिस्से हैं। भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति के स्तर पर विकास, सुशासन, सामाजिक समरसता, जनकल्याण और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को अपने संभावित चुनावी एजेंडे के प्रमुख बिंदुओं के रूप में रखा है। पार्टी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को भी चुनावी संवाद का आधार बनाने की तैयारी में है। इस पूरी कवायद का राजनीतिक संदेश साफ हैकृ2027 का चुनाव भाजपा केवल चुनावी मौसम में शुरू होने वाला अभियान नहीं बनाना चाहती। संगठन की गतिविधियों को पहले से ही चुनावी तैयारी में बदलकर पार्टी मतदाताओं तक लगातार पहुंच बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब असली परीक्षा इस रणनीति के जमीन पर असर की होगी। संगठन बूथ तक कितना सक्रिय होता है, विधायक स्थानीय असंतोष को कितना दूर कर पाते हैं और सरकार की उपलब्धियों के साथ जनता की मौजूदा अपेक्षाओं का संवाद कितना प्रभावी बनता है।कृइन सवालों पर भाजपा की 2027 की चुनावी तैयारी की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

कोई टिप्पणी नहीं: