शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

भाजपा-कांग्रेस में आंकड़ों का ‘द्वंद’

एसआईआर पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा की चुनौती 7,522 नामों पर आपत्ति मंजूर, नौ लाख के दावे पर घेरा महेंद्र बोलेकृफार्म-7 से लाखों नाम काटने का आरोप भ्रामक स्थानांतरित मतदाताओं के आंकड़ों पर कांग्रेस से मांगा जवाब देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी संग्राम तेज हो गया है। मतदाता सूची से लाखों नाम कम होने पर कांग्रेस के सवालों के जवाब में भाजपा ने आंकड़ों के साथ पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि फार्म-7 के जरिए लाखों मतदाताओं के नाम काटने का आरोप वास्तविक आंकड़ों से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, फार्म-7 के तहत प्राप्त 96,704 आवेदनों में से जांच के बाद केवल 7,522 नाम हटाने की आपत्तियां स्वीकार की गईं, जबकि 89,182 आवेदन निरस्त कर दिए गए। भाजपा ने कांग्रेस से सवाल किया है कि यदि पुनरीक्षण के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत बताए गए मतदाता वास्तव में उत्तराखंड में रह रहे हैं, तो कांग्रेस उन्हें खोजकर निर्वाचन आयोग के सामने पेश करे। भट्ट ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के आंकड़ों को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे राजनीतिक विवाद का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। भाजपा की दलील है कि फार्म-7 के आंकड़ों और पूरी मतदाता सूची में आई कमी को एक ही नजरिये से देखना गलत है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, एसआईआर के दौरान 8,26,977 मतदाता अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि वाली श्रेणियों में चिह्नित किए गए थे। अंतिम मतदाता सूची में 71,58,949 मतदाता दर्ज हैं। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रारूप सूची के बाद 1,29,872 नए मतदाता जोड़े गए, जबकि 1,04,708 नाम हटाए गए। इनमें 7,522 नाम फार्म-7 पर स्वीकार की गई आपत्तियों के आधार पर हटाए गए। भाजपा इसी अंतर को कांग्रेस के आरोपों के जवाब के रूप में पेश कर रही है। पार्टी का तर्क है कि पूरी सूची में आई कमी को केवल फार्म-7 के जरिए नाम काटने की कार्रवाई बताना सही नहीं है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों और पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंकाएं उठाई गई हैं। ऐसे में विवाद का अंतिम समाधान राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग के सत्यापन और शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण से ही होगा। महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को चुनौती दी कि यदि पार्टी को लगता है कि सूची से हटाए गए लोग वास्तव में पात्र मतदाता हैं और उत्तराखंड में ही रह रहे हैं, तो वह उन्हें ढूंढकर आयोग के सामने पेश करे। भाजपा के इस बयान को कांग्रेस के आरोपों पर सीधा राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है। भाजपा का सवाल है कि यदि नाम हटाने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, तो कांग्रेस को संबंधित मतदाताओं और उनके मामलों के आधार पर शिकायतें सामने रखनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस की आशंकाओं की जांच करना और यह सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा जहां पुनरीक्षण को सूची दुरुस्त करने की प्रक्रिया बता रही है, वहीं कांग्रेस की चिंता पात्र मतदाताओं के नाम छूटने को लेकर है। इस विवाद में दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक तर्क रख रहे हैं, लेकिन सबसे अहम सवाल उन नागरिकों का है जिनके नाम नई सूची में नहीं हैं। लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना भी है। इसलिए भाजपा की चुनौती और कांग्रेस के आरोपों के बीच अब निगाहें निर्वाचन आयोग की जांच, नामों के पुनर्सत्यापन और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के प्रयासों पर रहेंगी।

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