सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
चुनावी जंग से पहले कांग्रेस ने उतारी ‘फौज’
प्रदेश की 70 विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी तैनात
27 संगठनात्मक क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी सौंपी
संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव का मुकाबला दिलचस्प होने लगा है। भाजपा की ओर से सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद अब कांग्रेस ने भी संगठनात्मक मोर्चे पर अपनी ताकत झोंक दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने वरिष्ठ नेताओं को जिला, महानगर और विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारियां सौंपकर चुनावी तैयारी तेज करने का संदेश दिया है। पार्टी ने सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारी नियुक्त किए हैं। इसके साथ ही 27 संगठनात्मक क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां बांटी गई हैं।
कांग्रेस की इस कवायद को केवल संगठनात्मक नियुक्तियों तक सीमित नहीं माना जा रहा। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी का मुकाबला करने के साथ अपने भीतर की गुटबाजी पर अंकुश लगाने की भी है। ऐसे में इन नियुक्तियों के जरिए प्रदेश नेतृत्व ने नेताओं को जिम्मेदारी के दायरे में लाने और चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने की कोशिश की है। प्रदेश कांग्रेस ने आठ उपाध्यक्षों और 19 महामंत्रियों को अलग-अलग संगठनात्मक क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा पार्टी के विभागों और प्रकोष्ठों में भी पदाधिकारियों को दायित्व दिए गए हैं। नियुक्त प्रभारियों से नियमित क्षेत्रीय प्रवास, संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा और कार्यकर्ताओं से संवाद करने की अपेक्षा की गई है।
कांग्रेस के सामने अब असली परीक्षा इन नियुक्तियों को जमीन पर उतारने की होगी। चुनावी राजनीति में प्रभारी नियुक्त करना पहला कदम है, लेकिन मतदाताओं तक पहुंच बनाना, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और स्थानीय मुद्दों पर आंदोलन खड़ा करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण काम है। कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, महिलाओं के विरुद्ध अपराध और किसानों व युवाओं की समस्याओं को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाने की रणनीति बनाई है। पार्टी इन विषयों पर जनसंपर्क अभियान, धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलनों के माध्यम से जनता के बीच अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इन मुद्दों को चुनावी अभियान की एकजुट आवाज बना पाएगी? प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर असंतोष विपक्ष के लिए अवसर पैदा कर सकता है। इसके बावजूद केवल सरकार को घेरना पर्याप्त नहीं होगा। कांग्रेस को यह भी बताना होगा कि सत्ता में आने पर वह इन समस्याओं का समाधान किस तरह करेगी। उत्तराखंड कांग्रेस की चुनावी रणनीति में संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ नेताओं के बीच तालमेल भी अहम होगा। पार्टी के सामने विभिन्न गुटों को एक मंच पर लाने, स्थानीय स्तर पर नेतृत्व के टकराव को रोकने और टिकट की दावेदारी को लेकर संभावित विवादों को संभालने की चुनौती है।
प्रदेश नेतृत्व के लिए यह सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा कि नियुक्त प्रभारी केवल पद की औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि संबंधित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय भी दिखाई दें। यदि वरिष्ठ नेता अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने में सफल होते हैं तो इसका लाभ चुनाव के समय मिल सकता है। इसके विपरीत, जिम्मेदारियों के बावजूद आपसी खींचतान जारी रही तो नियुक्तियों का अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल होगा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं। अब कांग्रेस की कोशिश सत्ता विरोधी माहौल को अपने पक्ष में बदलने और भाजपा को कड़ी चुनौती देने की है।
गणेश गोदियाल के सामने दोहरी चुनौती हैकृएक ओर भाजपा सरकार के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक अभियान खड़ा करना और दूसरी ओर कांग्रेस के संगठन को चुनाव लड़ने लायक मजबूत बनाना। नियुक्तियों से कांग्रेस ने चुनावी तैयारी का संकेत दे दिया है, लेकिन असली मुकाबला अब मैदान में होगा। प्रभारी कितनी बार अपने क्षेत्रों में पहुंचते हैं, कार्यकर्ताओं को कितना सक्रिय करते हैं और जनता के मुद्दों को कितना प्रभावी ढंग से उठाते हैं, यही तय करेगा कि कांग्रेस की यह नई चुनावी फौज भाजपा के सामने कितनी बड़ी चुनौती बन पाती है।
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