रविवार, 20 सितंबर 2026

‘घर वापसी’ पर सियासी संग्राम

हरदा के शक्ति प्रदर्शन पर भाजपा का तंज, सम्मान की वापसी या भ्रष्टाचार के सवालों का जवाब हरीश रावत कि भाजपा ने रोड शो को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी सियासत पर साधा निशाना मुन्ना सिंह चौहान बोलेकृकांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए शक्ति प्रदर्शन का संदेश किसके लिए देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने और प्रस्तावित स्वागत कार्यक्रम को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा ने रावत के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि यदि रावत को कांग्रेस में पूरा सम्मान और महत्व मिल रहा है तो उनके स्वागत के नाम पर शक्ति प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ रही है? भाजपा ने इसे कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक वर्चस्व की खींचतान से जोड़ते हुए सवाल किया कि इस शक्ति प्रदर्शन का संदेश आखिर किसे दिया जा रहा है। भाजपा के इस हमले की टाइमिंग भी महत्वपूर्ण है। रावत लंबे स्वास्थ्य अवकाश के बाद 20 सितंबर को रामपुर तिराहा से उत्तराखंड की यात्रा शुरू कर रहे हैं। वहीं, पिछले दिनों उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद रावत ने कांग्रेस के कुछ सांगठनिक पदों से हटने की पेशकश की थी। हालांकि उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने की बात नहीं कही थी। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि रावत के स्वागत में प्रस्तावित शक्ति प्रदर्शन का उद्देश्य क्या है। पार्टी के अनुसार यदि यह महज एक वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य लाभ के बाद प्रदेश लौटने का स्वागत है तो इसे लेकर इतनी राजनीतिक चर्चा क्यों हो रही है और यदि यह शक्ति प्रदर्शन है तो इसका संदेश कांग्रेस के भीतर किसे दिया जा रहा है। भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने इसी सवाल को आधार बनाकर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर निशाना साधा। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर खींचतान पहले से दिखाई दे रही है और रावत का कार्यक्रम इसी अंतर्कलह को सामने ला रहा है। रावत की वापसी ऐसे समय हो रही है जब उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के खिलाफ ईडी की कार्रवाई राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ईडी की कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लान्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कार्रवाई में नकदी, सोना और महंगी घड़ियां बरामद किए जाने की बात सामने आई है। रावत ने इस प्रकरण के बाद कहा था कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए, इसलिए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पदों से हटने की पेशकश की। उन्होंने मामले की सच्चाई जांच से सामने आने की बात भी कही। इसके बाद रावत ने अपने ऊपर नौकरी के बदले पैसे लेने के आरोपों से सार्वजनिक रूप से इनकार करते हुए सोशल मीडिया पर भावनात्मक प्रतिक्रिया दी और अपनी मां की सौगंध का उल्लेख किया। अब भाजपा इसी घटनाक्रम को कांग्रेस की आंतरिक राजनीति से जोड़ रही है। भाजपा का सवाल है कि जिस नेता ने हाल में पार्टी के महत्वपूर्ण सांगठनिक पदों से हटने की पेशकश की, उनके लिए अचानक बड़े स्तर पर स्वागत और शक्ति प्रदर्शन की जरूरत क्यों महसूस हुई? भाजपा की ओर से इसे रावत के कांग्रेस में अपने राजनीतिक महत्व और सम्मान को लेकर चल रही कवायद के रूप में पेश किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यदि संगठन में रावत की भूमिका और सम्मान को लेकर कोई असमंजस नहीं है तो फिर शक्ति प्रदर्शन के जरिए राजनीतिक संदेश देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के सामने दो स्तरों की चुनौती खड़ी की है। एक ओर उसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सरकार के खिलाफ अपना राजनीतिक नैरेटिव मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय और नेतृत्व के सवाल को संभालना है। रावत के समर्थकों की सक्रियता कांग्रेस के लिए राजनीतिक ऊर्जा का माध्यम बन सकती है, लेकिन भाजपा इसे पार्टी की अंदरूनी खींचतान के तौर पर प्रचारित कर रही है। हालिया राजनीतिक विश्लेषणों में भी रावत की भूमिका, कांग्रेस के चुनावी नैरेटिव और संगठन में उनके समर्थक खेमे को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रामपुर तिराहा पर उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर रावत प्रदेश की यात्रा शुरू करेंगे। इसके बाद उनका कार्यक्रम हरिद्वार और देहरादून तक है। लंबे स्वास्थ्य अवकाश के बाद उनकी यह वापसी ऐसे समय हो रही है जब प्रदेश की राजनीति 2027 के चुनाव की ओर बढ़ रही है। यही वजह है कि रावत के स्वागत का कार्यक्रम केवल स्वागत समारोह तक सीमित नहीं रह गया है। भाजपा ने इसे कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल से जोड़ दिया है। अब सवाल भाजपा ने उछाला है, जवाब कांग्रेस और रावत के पास हैकृयह आयोजन सिर्फ एक वरिष्ठ नेता की वापसी का स्वागत है, भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों के बीच राजनीतिक समर्थन का प्रदर्शन है, या कांग्रेस के भीतर अपने राजनीतिक सम्मान और प्रभाव को फिर से स्थापित करने की कवायद? रामपुर तिराहा से हरदा की वापसी के साथ यह सवाल भी उत्तराखंड की सियासत में कदम रख चुका है।

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