सोमवार, 28 सितंबर 2026

कांग्रेस के ‘सवाल’ पर भाजपा का ‘पलटवार’

एसआईआर की निष्पक्षता पर कांग्रेस के सवाल भाजपा बोलीकृझूठ का सहारा ले रही कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले हो रही भ्रम फैलाने की राजनीतिक देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस जहां एसआईआर की प्रक्रिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे चुनाव से पहले भ्रम फैलाने की राजनीतिक कोशिश बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठ बताते हुए कहा कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, कांग्रेस को एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित कराने के लिए जमीन पर काम करना चाहिए। भट्ट का हमला ऐसे समय हुआ है जब उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का मुद्दा अब भाजपा और कांग्रेस के बीच व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा का तर्क है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक वैधानिक प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना है। कांग्रेस इसके तौर-तरीकों और संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रही है। उत्तराखंड में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में फार्म-7 आवेदन सामने आने के बाद भी राजनीतिक बहस तेज हुई है। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, करीब 1.73 लाख फार्म-7 आवेदनों में 95 हजार से अधिक को जांच के दौरान अपात्र श्रेणी में रखा गया। निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम स्वतः हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है। महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पहले चुनाव परिणामों को ईवीएम से जोड़ती रही और अब एसआईआर को लेकर सवाल उठाकर भविष्य के चुनाव परिणामों के लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि किसी पात्र मतदाता को एसआईआर के दौरान परेशानी आ रही है तो पार्टी उसकी मदद के लिए कितने स्तर पर अभियान चला रही है। भाजपा का यह हमला सीधे तौर पर कांग्रेस की चुनावी रणनीति को निशाने पर लेने वाला है। पार्टी का संदेश साफ है कि एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों को वह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहने देना चाहती, बल्कि इसे कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में पेश कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट और पारदर्शी जवाब मिलना चाहिए। कांग्रेस ने निर्वाचन कार्यालय के घेराव और प्रदर्शन के जरिए इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग तथा एसआईआर को लेकर सवाल उठाए हैं। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने आरोपों को निराधार बताया है। निर्वाचन आयोग की ओर से भी एसआईआर से जुड़े निर्णयों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है। उत्तराखंड में अब एसआईआर केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बन चुकी है। भाजपा इसे मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की संवैधानिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस प्रक्रिया की पारदर्शिता और संभावित प्रभावों पर सवाल उठा रही है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं। भाजपा जहां कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस निर्वाचन आयोग से जुड़े अपने सवालों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। 2027 के चुनावी रण में बेरोजगारी, पलायन, भू-कानून और विकास के साथ अब मतदाता सूची और एसआईआर भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है। सवाल केवल यह नहीं कि सूची में किसका नाम है, बल्कि यह भी है कि चुनाव से पहले इस पूरी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच किस दल का राजनीतिक नैरेटिव ज्यादा प्रभाव डालता है।

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