मंगलवार, 29 सितंबर 2026

एसआईआर पर देशभर में सड़क पर कांग्रेस

पार्टी ने सीईसी के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कांग्रेस का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर मतदाता सूचियों से जायज वोटरों के नाम काटे तकनीकी प्रक्रिया न मानकर देश के मताधिकार और लोकतांत्रिक प्रणाली की साख से जुड़ा मुद्दा बताया देहरादून। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली सहित कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे तथा एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी इसे केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मामला नहीं, बल्कि मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दिल्ली, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, मणिपुर, कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन कार्यालयों तक मार्च निकाला और ज्ञापन सौंपे। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया का बचाव किया है। कांग्रेस की रणनीति केवल प्रदर्शन तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रही है। पार्टी की कार्यसमिति ने एसआईआर, निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा की है। कांग्रेस इस मुद्दे को विपक्षी दलों के साझा मंच तक ले जाने की तैयारी में है। यानी आने वाले दिनों में एसआईआर बनाम विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई और तेज हो सकती है। कांग्रेस इसे चुनावी लोकतंत्र और मताधिकार का प्रश्न बना रही है, जबकि भाजपा और उसके समर्थक एसआईआर को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की आवश्यक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। दिल्ली से निकली यह राजनीतिक गर्मी अब राज्यों की राजनीति में भी पहुंच चुकी है। उत्तराखंड में भी एसआईआर और निर्वाचन आयोग को लेकर कांग्रेस पहले ही विरोध दर्ज करा चुकी है। ऐसे में देशव्यापी अभियान के अगले चरण का असर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ना स्वाभाविक है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची और एसआईआर का मुद्दा भाजपा-कांग्रेस के बीच एक और बड़ा राजनीतिक मोर्चा बन सकता है। एक तरफ कांग्रेस इसे मतदाता के अधिकार का सवाल बना रही है, दूसरी तरफ भाजपा इसे मतदाता सूची की शुचिता से जोड़ रही है। चुनावी राजनीति के लिहाज से अब असली लड़ाई सिर्फ मतदाता सूची की नहीं, बल्कि उस पर जनता के भरोसे की है।

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