रविवार, 27 सितंबर 2026

बदरीनाथ में डीजे कान्सर्ट पर घमासान

डीएम ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग आफिसर को भेजा नोटिस बिना अनुमति कैसे हुआ बदरीनाथ धाम में डीजे कान्सर्ट का आयोजन ऊंची आवाज में साउंड सिस्टम लगाने का भी डीएम ने मांगा जवाब देहरादून। बदरीनाथ धाम में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान डीजे और तेज ध्वनि में संगीत कार्यक्रम को लेकर विवाद अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और संतों की आपत्ति के बीच चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग आफिसर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। डीएम ने पूछा है कि बदरीनाथ धाम क्षेत्र में इस तरह के आयोजन के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं और कार्यक्रम में उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल क्यों किया गया। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कार्यक्रम के सांस्कृतिक हिस्से के आयोजन और भुगतान में जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार की भूमिका नहीं थी। डीएम के अनुसार 19 और 20 सितंबर को भारतीय सेना की ओर से बामणी और माणा क्षेत्र में वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिला प्रशासन की भूमिका केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए स्टाल लगाने तक सीमित थी। बदरीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में 19 और 20 सितंबर को देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 आयोजित किया गया था। यह आयोजन भारतीय सेना की आपरेशन सद्भावना पहल के तहत किया गया था। इसका घोषित उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों की लोक संस्कृति, परंपराओं, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक गायिका प्रियंका मेहर की प्रस्तुति भी हुई। कार्यक्रम के दौरान तेज संगीत और नृत्य के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद विवाद खड़ा हुआ। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बदरीनाथ पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की और कार्यक्रम में शामिल हुए। यही वजह है कि आयोजन की जिम्मेदारी और अनुमति को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है। चमोली प्रशासन की ओर से गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग आफिसर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बदरीनाथ धार्मिक आस्था का केंद्र है और वहां इस तरह के सामूहिक आयोजन तथा उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल धाम की गरिमा के अनुरूप नहीं है। डीएम ने कार्यक्रम के औचित्य और अनुमति से संबंधित जानकारी मांगी है। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न होने देने को कहा गया है। डीएम ने यह भी पूछा है कि कार्यक्रम के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं तथा तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल का कारण क्या था। प्रशासन ने आगे ऐसे आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आपत्ति जताई है। महापंचायत का कहना है कि उसका विरोध सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन से नहीं, बल्कि बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थल पर उसके स्वरूप और तेज ध्वनि वाले मनोरंजन कार्यक्रम से है। ज्योतिर्मठ से जुड़े संतों की ओर से भी आयोजन को लेकर आपत्ति जताई गई है और धार्मिक परंपराओं तथा धाम की मर्यादा के अनुरूप कार्यक्रम कराने की मांग की गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी ने भी बदरीनाथ में ऐसे संगीत कार्यक्रम पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने की मांग की। विवाद अब सिर्फ डीजे या संगीत कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। प्रशासन के नोटिस के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बदरीनाथ जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में इतने बड़े आयोजन की अनुमति की प्रक्रिया क्या थी और कार्यक्रम के स्वरूप को अंतिम मंजूरी किस स्तर से मिली? एक ओर प्रशासन का कहना है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का निर्धारण सेना की ओर से किया गया था, वहीं उपलब्ध रिपोर्टों में इस आयोजन को सेना, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित बताया गया है। यही अंतर अब जांच और स्पष्टीकरण का विषय बन गया है। प्रशासन ने फिलहाल सेना से जवाब मांगा है। सेना की ओर से आधिकारिक जवाब आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आयोजन की अनुमति किस स्तर से ली गई थी और कार्यक्रम में तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल का निर्णय किस आधार पर लिया गया। बदरीनाथ में संस्कृति के नाम पर आयोजन को लेकर उठा विवाद अब धार्मिक मर्यादा बनाम मनोरंजन के सवाल से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है।

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