सोमवार, 21 सितंबर 2026
उत्तराखंड में ‘मुन्नाभाइयों’ की सेंधमारी
फर्जी डोमिसाइल के सहारे डाक्टरी की सीट पर कब्जा करने का आरोप
एमबीबीएस की 370 सीटों के डोमिसाइल पर उठे सवाल, जांच के आदेश
एनईईटी के बाद दाखिले में इस्तेमाल प्रमाणपत्रों पर घपले का जताया अंदेशा
देहरादून एसडीएम और पटवारी की भूमिका भी आ गई है सवालों के घेरे में
देहरादून। उत्तराखंड में एमबीबीएस दाखिलों से जुड़े डोमिसाइल प्रमाणपत्रों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एनईईटी के बाद राज्य में एमबीबीएस की 855 सीटों में से करीब 370 सीटों के लिए इस्तेमाल किए गए डोमिसाइल प्रमाणपत्रों में कथित गड़बड़ी का अंदेशा सामने आया है। मामले में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले को लेकर पत्रकार प्रदीप बहुगुणा ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर उन्हें पूरे प्रकरण की जानकारी दी और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने मंत्री के समक्ष यह सवाल उठाया कि यदि दाखिले के लिए प्रस्तुत डोमिसाइल प्रमाणपत्रों में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी देहरादून को पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। मंत्री के अनुसार जिलाधिकारी को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मामले में डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी करने के दौरान राजस्व विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। आरोपों के मुताबिक कुछ प्रमाणपत्रों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित आवेदकों की पात्रता और स्थायी निवास से जुड़े दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन किया गया था या नहीं। ऐसे में जांच में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और सत्यापन रिपोर्ट की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। एसडीएम और पटवारी स्तर पर हुई कार्रवाई भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
एमबीबीएस की कुल 855 सीटों में से 370 सीटों से जुड़े डोमिसाइल प्रमाणपत्रों पर सवाल उठना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेडिकल दाखिलों में राज्य कोटे की सीटों के लिए पात्रता से जुड़े दस्तावेज अहम भूमिका निभाते हैं। यदि जांच में प्रमाणपत्रों में अनियमितता साबित होती है तो इसका असर संबंधित दाखिलों की वैधता पर भी पड़ सकता है।
हालांकि फिलहाल यह घपला साबित नहीं हुआ है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच का दायरा कितना व्यापक रखा जाता है और किन-किन प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। स्वास्थ्य मंत्री के स्तर से जांच के आदेश के बाद अब निगाह एक सप्ताह में आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य स्तर पर गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो कार्रवाई के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि डोमिसाइल प्रमाणपत्रों के सत्यापन की व्यवस्था में चूक कहां हुई।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें