सोमवार, 21 सितंबर 2026

कमीशनखोरी की बलि चढ़े ‘गरीब’

मंत्री खजान दास के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटा कार्यकर्ताओं का दावा,कृकांग्रेसियों को बांटे जा रहे 80 प्रतिशत काम अपनों के ही निशाने पर कैबिनेट मंत्री, आवास के बाहर उग्र प्रदर्शन मंत्री खजान दास बोले- आरोप साबित हुए तो मंत्री पद ही छोड़ दूंगा देहरादून। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण योजनाओं में कथित कमीशनखोरी को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रदर्शनकारियों ने कैबिनेट मंत्री खजान दास के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए योजनाओं के लाभार्थी चयन और विकास कार्यों के आवंटन में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि योजनाओं के काम आवंटित करने में 15 से 20 प्रतिशत तक कमीशन लिया जा रहा है और इसके चलते करीब 80 प्रतिशत काम कांग्रेस से जुड़े लोगों को दिए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना था कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए संचालित योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है, लेकिन कथित अनियमितताओं के कारण वास्तविक लाभार्थी पीछे छूट रहे हैं। मंत्री खजान दास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों में यदि एक भी आरोप साबित हो जाता है तो वह मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। मंत्री ने इससे भी आगे बढ़कर कहा कि आरोप साबित होने पर वह आत्महत्या तक कर लेंगे। मंत्री के इस बयान के बाद मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा में आ गया है। चकराता क्षेत्र से आए भाजपा नेताओं का मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि आरोप विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने योजनाओं में पारदर्शिता, पात्र लोगों को लाभ और कामों के निष्पक्ष आवंटन की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि योजनाओं में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है तो लाभार्थी चयन और कामों के आवंटन की प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके साथ ही कथित कमीशनखोरी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। मंत्री खजान दास के बयान ने अब विवाद को सीधे आरोप बनाम प्रमाण के सवाल में बदल दिया है। मंत्री ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो वह अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं समझेंगे। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। मामले ने भाजपा के भीतर चकराता विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक खींचतान को भी सतह पर ला दिया है। एक ओर पार्टी से जुड़े नेता मंत्री पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं मंत्री आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। अब निगाह इस बात पर है कि लगाए गए आरोपों की कोई औपचारिक जांच होती है या नहीं और सरकार अथवा संबंधित विभाग लाभार्थी चयन तथा कार्य आवंटन से जुड़े रिकार्ड सार्वजनिक कर इस विवाद की तस्वीर साफ करता है या नहीं। फिलहाल कमीशनखोरी के आरोप और मंत्री का बेहद कठोर बयान देहरादून की सियासत के केंद्र में आ गए हैं।

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