रविवार, 4 अक्टूबर 2026
भाजपा की 60 पार की हुंकार
तीसरी जीत के लिए भाजपा ने बदला लक्ष्य
बहुमत से आगे सबसे बड़े जनादेश की तैयारी
70 सदस्यीय विधानसभा में 60 का आंकड़ा
60 का आंकड़ा विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात पर भाजपा ने अपना लक्ष्य अब महज सत्ता में वापसी तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के साथ 60 सीट पार करने का लक्ष्य सामने रखा है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राम माधव ने हालिया संगठनात्मक बैठक में साफ कहा कि इस बार लक्ष्य केवल पूर्ण बहुमत नहीं, बल्कि सबसे बड़ा बहुमत हासिल करना है।
भाजपा की रणनीति में यह बदलाव महज आंकड़े का खेल नहीं है। 70 सदस्यीय विधानसभा में 60 का आंकड़ा विपक्ष के लिए राजनीतिक चुनौती का बड़ा संदेश भी है। पार्टी नेतृत्व अब संगठन को चुनावी मोड में पूरी तरह उतारने की तैयारी कर रहा है। बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को चुनावी लक्ष्य से जोड़ा जा रहा है। 19 संगठनात्मक जिलों के लिए प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए जा चुके हैं।
राम माधव ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि चुनाव में केवल सरकार बनाने लायक संख्या हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। पार्टी को 60 पार के लिए काम करना है। भाजपा इसे केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की धामी सरकार के कामकाज को चुनावी मुद्दा बनाकर हासिल करने की रणनीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी लगातार तीसरी जीत के लक्ष्य को लेकर संगठन को सक्रिय कर रहे हैं। पार्टी की ओर से बूथ स्तर तक सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को पहुंचाने पर जोर है। विधानसभा चुनाव के लिए अलग-अलग सीटों पर स्थानीय मुद्दों, बूथ प्रबंधन और प्रत्याशी चयन की तैयारी भी की जा रही है।
भाजपा के सामने चुनौती केवल 60 सीटों का लक्ष्य घोषित करने की नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक आधार को बरकरार रखने की भी है। पार्टी नेतृत्व इसलिए संगठन को पहले से चुनावी ढांचे में ढाल रहा है। मंडल स्तर तक प्रशिक्षण, विधानसभा स्तर की कोर कमेटियां और जिलों में जिम्मेदारियां इसी रणनीति का हिस्सा हैं। नए प्रदेश प्रभारी राम माधव, सह प्रभारी बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन की नियुक्ति के बाद केंद्रीय संगठन ने भी उत्तराखंड के चुनाव को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। भाजपा का दावा है कि सरकार की उपलब्धियों और संगठन की ताकत के आधार पर लगातार तीसरी सरकार का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। लेकिन 60 पार का लक्ष्य भाजपा के लिए अपने आप में एक राजनीतिक कसौटी भी है। जितना बड़ा लक्ष्य, उतनी बड़ी जवाबदेही। अब पार्टी को यह बताना होगा कि 60 सीटों तक पहुंचने के लिए वह किन क्षेत्रों में अपना आधार बढ़ाएगी, किन सीटों पर पिछली कमियों को दूर करेगी और स्थानीय असंतोष तथा विपक्षी चुनौती का सामना किस तरह करेगी।
यही कारण है कि 2027 का चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ सत्ता दोहराने का चुनाव नहीं, बल्कि अपने घोषित तीसरी बार और 60 पार के लक्ष्य को जमीन पर साबित करने की परीक्षा बनता जा रहा है। अभी भाजपा ने लक्ष्य तय कर दिया है और आने वाले महीनों में बूथ से लेकर प्रत्याशी चयन तक की रणनीति यह तय करेगी कि यह लक्ष्य संगठनात्मक संकल्प भर रहता है या चुनावी अभियान का केंद्रीय मुद्दा बनता है।
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