गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में ‘जेन-जी’ मांग रहा है जवाब
रोजगार से लेकर भर्ती और पलायन तक मुद्दों पर मुखर
2027 से पहले राजनीतिक दलों के लिए बढ़ गई चुनौती
हाल के युवा संवाद कार्यक्रमों में यही तस्वीर सामने आई
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में जेन-जी अब केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय पीढ़ी नहीं, बल्कि चुनावी विमर्श को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण युवा वर्ग बनती दिख रही है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ानी शुरू कर दी है। लेकिन जेन-जी का मूड केवल राजनीतिक नारों या नेताओं की अपील तक सीमित दिखाई नहीं देता। रोजगार, पारदर्शी भर्ती, शिक्षा, पलायन, उद्यमिता और डिजिटल अवसर जैसे सवाल उसके राजनीतिक संवाद के केंद्र में हैं। हाल के युवा संवाद कार्यक्रमों में भी यही तस्वीर सामने आई है। मेरे सपनों का उत्तराखंड अभियान के तहत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती और पर्यटन से जुड़े सुझाव दिए। मुख्यमंत्री के साथ हुए संवाद में भी युवाओं ने राज्य के भविष्य को लेकर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं।
जेन-जी के सामने राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह पीढ़ी केवल भाषण सुनकर संतुष्ट होने वाली नहीं दिखती। वह सवाल पूछती है कि रोजगार कहां है, भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है, पढ़ाई के बाद अवसर कहां मिलेंगे और पहाड़ में रहने वाले युवाओं के लिए भविष्य की क्या गारंटी है। देशव्यापी युवा सर्वेक्षणों में भी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को युवाओं की प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकताओं में बताया गया है। इससे उत्तराखंड में भी युवा राजनीति को केवल भावनात्मक मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा के अवसरों और भविष्य से जोड़ने की जरूरत सामने आती है।
2026 की प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार उत्तराखंड में करीब 17 लाख युवा मतदाता हैं और 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति पर जोर दे रहे हैं। भाजपा की ओर से युवाओं से संवाद और युवा विद्यार्थी मंथन जैसे कार्यक्रम किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने तीन लाख से अधिक छात्रों से संवाद का कार्यक्रम भी शुरू किया था। वहीं विपक्ष भी युवाओं के बीच रोजगार, भर्ती और शिक्षा जैसे सवालों को प्रमुखता दे रहा है। उत्तराखंड के संदर्भ में युवा सवाल और भी गहरे हैं। पहाड़ से पलायन रोकना है तो रोजगार कहां पैदा होगा? उच्च शिक्षा के बाद युवा राज्य में क्यों रुकेगा? प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था कैसे मिलेगी? स्थानीय संसाधनों से उद्यमिता के अवसर कैसे बनेंगे?
यही वह सवाल हैं जिनका जवाब चुनावी घोषणा-पत्रों से आगे जमीन पर चाहिए। 2027 की राजनीति में जेन-जी किस दल के साथ जाएगी, इसका निष्कर्ष अभी निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर स्पष्ट है कि उत्तराखंड का युवा अब केवल किसके साथ का सवाल नहीं पूछ रहाकृवह क्यों और क्या मिलेगा का जवाब भी मांग रहा है। यही बदलाव आने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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