गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

फिर नीट-यूजी पर सियासी घमासान

विधायक विनोद चमोली ने यशपाल आर्य के आरोपों पर किया पलटवार भाजपा विधायक बोलेकृव्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले तथ्य सामने रखें बोले-प्रदेश सरकार ने शिकायत मिलते ही जांच का दायरा भी बढ़ा दिया देहरादून। उत्तराखंड में नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर सामने आए मामलों ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के आरोपों पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया। दरअसल, नीट-यूजी 2026 की राज्य काउंसलिंग में फर्जी अथवा संदिग्ध प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने के मामले सामने आने के बाद जांच और कार्रवाई का सिलसिला जारी है। हाल में 12 और अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर उनके सीट आवंटन निरस्त किए गए। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली और प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के आरोपों के जवाब में चमोली ने कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने से पहले तथ्यों को सामने रखना जरूरी है। भाजपा का तर्क है कि सरकार ने शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि मामले सामने आते ही जांच के निर्देश दिए और प्रमाणपत्रों के सत्यापन का दायरा बढ़ाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सभी आरक्षित श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए थे। शुरुआती जांच में प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ प्रवेश भी रद्द किए गए हैं। चमोली के पलटवार का राजनीतिक संदेश साफ हैकृकि भाजपा इस पूरे प्रकरण को व्यवस्था में सामने आई गड़बड़ी की जांच और दोषियों पर कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़कर सवाल उठा रही है। मामले ने इसलिए भी गंभीरता बढ़ा दी है क्योंकि सवाल सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है। जांच अब इस बात तक पहुंच रही है कि प्रमाणपत्र जारी करने से लेकर काउंसलिंग में उनके सत्यापन तक कहीं प्रक्रियागत चूक हुई या नहीं। पिछले वर्षों के दाखिलों के रिकॉर्ड की जांच की संभावना भी सामने आई है। ऐसे में नीट-यूजी विवाद अब केवल शिक्षा और चिकित्सा प्रवेश का मुद्दा नहीं रह गया है। विधानसभा चुनाव से पहले यह सरकार की पारदर्शिता बनाम विपक्ष की जवाबदेही की राजनीति का नया अखाड़ा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस जहां सरकार से पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही मांग सकती है, वहीं भाजपा कार्रवाई को अपनी सरकार की सख्ती के प्रमाण के तौर पर सामने रख सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल आखिर किस स्तर पर संभव हुआ और पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी तय होती है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे अब निगाह जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई पर रहेगी।

कोई टिप्पणी नहीं: