मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

वोट चोरी पर चुनाव से पहले ‘सियासी तपिश’

वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ सड़क पर उतरेगी कांग्रेस मतदाता सूची के कथित विलोपन को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी एसआईआर प्रक्रिया पर सवालों के बीच कांग्रेस का आक्रामक रुख देहरादून/नई दिल्ली। चुनावी राजनीति के अगले दौर से पहले कांग्रेस ने मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपने अभियान को देशव्यापी विस्तार देने का फैसला किया है। पार्टी ने वोट बचाओ, देश बचाओ के नारे के साथ 10 अक्टूबर से महीनेभर का आंदोलन चलाने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। निर्वाचन आयोग और भाजपा इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी अलग स्थिति रखते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्षों, प्रदेश प्रभारियों और अग्रिम संगठनों के प्रमुखों के साथ आंदोलन की रणनीति तय की गई। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अभियान को गांव, ब्लाक और जिला स्तर तक ले जाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति अब केवल प्रेस वार्ता और दिल्ली के धरने तक सीमित रहने वाली नहीं है। 10 से 20 अक्टूबर तक ब्लाक स्तर पर बाइक रैली, साइकिल रैली और पदयात्राएं आयोजित करने की योजना है। इसके बाद 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांवों में चौपाल लगाने और मतदाता सूचियों की पड़ताल करने का कार्यक्रम रखा गया है। कांग्रेस ने ऐसे कार्यकर्ताओं को वोट रक्षक की भूमिका देने की बात कही है, जो कथित रूप से सूची से बाहर हुए मतदाताओं तक पहुंचेंगे। कांग्रेस के इस अभियान का मूल राजनीतिक केंद्र मतदाता सूची है। पार्टी लगातार आरोप लगाती रही है कि एसआईआर के दौरान नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने इसी मुद्दे को वोट चोरी के राजनीतिक नारे में बदल दिया है। वहीं, इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा है। पांच अक्टूबर को अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने फार्म-6 के किसी संशोधित स्वरूप को मंजूरी नहीं दी थी। कांग्रेस ने इस टिप्पणी को अपने आरोपों के समर्थन के रूप में पेश किया है। हालांकि, इस टिप्पणी को मतदाता सूची में कथित व्यापक हेरफेर के कांग्रेस के सभी राजनीतिक आरोपों की पुष्टि मानना अलग विषय है। यही वजह है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे को केवल कानूनी या प्रशासनिक बहस न रखकर राजनीतिक आंदोलन में बदलने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस की रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आंदोलन का विस्तार है। पार्टी को अब केवल बड़े शहरों में प्रदर्शन करने के बजाय बूथ और गांव तक पहुंचने की तैयारी करनी है। 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांवों में चौपालों के जरिए मतदाता सूची में नामों की स्थिति देखने और कथित रूप से बाहर किए गए मतदाताओं से संपर्क करने का कार्यक्रम इसी रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस का यह अभियान आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 2027 में चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची का सवाल सीधे चुनावी राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र और मताधिकार का मुद्दा बना रही है, जबकि भाजपा और निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े पक्ष कांग्रेस के आरोपों पर अलग रुख रखते हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने विपक्षी दलों को भी साथ लाने की कोशिश की है। आईएनडीआईए के घटक दलों ने दो से आठ अक्टूबर के बीच जिला स्तर पर लोकतंत्र बचाओ मार्च और कार्यक्रमों का निर्णय लिया था। छह अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के निर्वाचन आयोग तक मार्च की योजना भी बनाई गई। हालांकि विपक्षी एकजुटता की वास्तविक परीक्षा जमीन पर होगी। अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रीय दलों के अपने राजनीतिक हित हैं। ऐसे में वोट चोरी का मुद्दा विपक्षी दलों को कितनी दूर तक एक मंच पर रख पाता है, यह देखने वाली बात होगी। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी पहले ही तेज हो चुकी है। ऐसे में कांग्रेस के इस देशव्यापी अभियान का असर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ना स्वाभाविक है। राज्य कांग्रेस मतदाता सूची के मुद्दे को बूथ स्तर तक ले जाने की कोशिश कर सकती है। छह अक्टूबर को पौड़ी क्षेत्र में कांग्रेस की ओर से निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रदर्शन की तैयारी की खबर भी सामने आई है। उत्तराखंड में एसआईआर और मतदाता सूची का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी मुकाबला अब बूथ स्तर तक पहुंच चुका है। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह अभियान संगठन को सक्रिय करने का माध्यम भी बन सकता है। लेकिन इसकी राजनीतिक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी आरोपों को प्रमाणित तथ्यों और स्थानीय मतदाताओं की वास्तविक शिकायतों से किस तरह जोड़ती है। कांग्रेस ने अपने आंदोलन का एक बड़ा हिस्सा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के इर्द-गिर्द रखा है। केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता। यह मांग अब कांग्रेस के लिए महज एक प्रशासनिक सवाल नहीं रह गई है। पार्टी इसे व्यापक चुनावी सुधार और मतदाता अधिकारों के मुद्दे से जोड़ रही है। वहीं, चुनाव आयोग की भूमिका पर लगाए गए राजनीतिक आरोपों को तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं की कसौटी पर परखा जाना बाकी है। दरअसल, कांग्रेस ने वोट चोरी के आरोप को अब एक चुनावी नारे से आगे बढ़ाकर देशव्यापी राजनीतिक अभियान का रूप दे दिया है। सड़क पर मार्च से लेकर गांव की चौपाल और बूथ स्तर पर मतदाता सूची की पड़ताल तककृपार्टी का लक्ष्य इस मुद्दे को चुनावी विमर्श के केंद्र में रखना है। आने वाले एक महीने में यह साफ होगा कि यह अभियान केवल राजनीतिक आंदोलन बनकर रहता है या मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर ठोस बहस भी खड़ी करता है।

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