शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
विपक्ष के सवालों पर भाजपा का पलटवार
भाजपा का तंज हताशा में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा विपक्ष
मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस
भाजपा ने की त्रुटिहीन सूची के लिए प्रक्रिया में सहयोग की अपील
एसआईआर पर भाजपा ने विपक्ष के आंदोलन को बताया हताशा
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। विपक्षी दल जहां एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे रोकने की मांग कर रहे हैं, वहीं भाजपा ने इस विरोध को राजनीतिक मुद्दा बनाकर चुनावी माहौल गरमाने की कोशिश करार दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए जनता का विश्वास हासिल करने में असफल लोग अब हताशा में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
भाजपा का तर्क है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक त्रुटिहीन बनाना है। पार्टी ने कांग्रेस से प्रक्रिया का विरोध करने के बजाय आपत्तियों के निस्तारण में सहयोग करने की अपील भी की है। अगस्त में भट्ट ने कहा था कि राजनीतिक दलों और नागरिकों को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव ऐसे समय बढ़ रहा है, जब उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह एसआईआर को आगामी चुनाव में अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना रही है और चुनावी हार की आशंका के बीच नए मुद्दे तलाश रही है। कांग्रेस की ओर से इसके विपरीत एसआईआर और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यानी मतदाता सूची का तकनीकी पुनरीक्षण अब सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा इसे चुनावी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने वाली संवैधानिक प्रक्रिया के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रहा है।
एसआईआर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी विवाद चल रहा है। निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर को कहा था कि एसआईआर से संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं और प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। भाजपा ने आयोग के फैसलों का बचाव करते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। इस बीच भाजपा के कुछ सहयोगी दलों ने भी एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग से अधिक स्पष्टता और पारदर्शिता की मांग की है, जिससे यह मुद्दा केवल भाजपा बनाम विपक्ष की बहस तक सीमित नहीं रह गया है।
उत्तराखंड में अब एसआईआर को लेकर दो समानांतर राजनीतिक नैरेटिव दिखाई दे रहे हैं। भाजपा इसे मतदाता सूची की शुद्धता और संवैधानिक प्रक्रिया से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष इसे मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता के सवाल से जोड़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ता टकराव आने वाले महीनों में चुनावी विमर्श का हिस्सा बन सकता है। 2027 के चुनाव से पहले एसआईआर पर छिड़ी यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची सीधे चुनाव की बुनियाद से जुड़ी है। ऐसे में राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना अहम होगा कि पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें, आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण हो और पूरी प्रक्रिया के बारे में मतदाताओं को स्पष्ट जानकारी मिले।
फिलहाल भाजपा ने विपक्ष के आंदोलन को संवैधानिक प्रक्रिया से जनता का विश्वास जीतने में असफल लोगों की हताशा बताया है, जबकि विपक्ष एसआईआर की प्रक्रिया पर अपने सवालों के साथ आंदोलन जारी रखने की तैयारी में है। इस तरह उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में एसआईआर अब महज मतदाता सूची के पुनरीक्षण का प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि 2027 से पहले भाजपा और विपक्ष के बीच एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
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