शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
कांग्रेस का लोकतंत्र बचाओ सप्ताह
जिला स्तर पर निकलेगा वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च
मतदान के अधिकार से जुड़े सवाल अब जनता के बीच
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ा
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपना आंदोलन तेज करने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने जिला स्तर पर लोकतंत्र बचाओ सप्ताह आयोजित करने और इसके तहत वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च निकालने का निर्णय लिया है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को जनता के बीच ले जाना जरूरी है।
कांग्रेस के इस अभियान को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पार्टी संगठन को जिला और ब्लाक स्तर तक सक्रिय करने के साथ एसआईआर के मुद्दे पर कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं के बीच संवाद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का फोकस अब इस मुद्दे को केवल नेताओं की बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय सड़क और जनसंपर्क अभियान तक ले जाने पर है।
कांग्रेस लंबे समय से एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता जिला मुख्यालयों पर मार्च निकालेंगे और जनता के बीच अपनी बात रखेंगे। वहीं भाजपा एसआईआर को निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस के विरोध को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश के रूप में देख रही है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की संवैधानिक प्रक्रिया का विरोध करने के बजाय राजनीतिक दलों को इसमें सहयोग करना चाहिए।
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। कांग्रेस इसके समानांतर सरकार के खिलाफ जनमुद्दों को लेकर आंदोलन की रणनीति आगे बढ़ा रही है। ऐसे में वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च कांग्रेस के लिए केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं को चुनावी अभियान के लिए सक्रिय करने का माध्यम भी बन सकता है। जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों के जरिए पार्टी स्थानीय मुद्दों को एसआईआर के सवाल के साथ जोड़कर जनता तक पहुंचाने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस की रणनीति में मतदाता अधिकार को केंद्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाता सबसे महत्वपूर्ण है और उसके मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित होना जरूरी है। कांग्रेस इसी संदेश के साथ अपने अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस को जनता के बीच यह भी स्पष्ट करना होगा कि एसआईआर में उसकी आपत्तियां क्या हैं और उनके समाधान के लिए वह क्या ठोस विकल्प चाहती है। दूसरी ओर भाजपा संवैधानिक प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका को आधार बनाकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दे रही है।
इस तरह 2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड में मतदाता सूची का मुद्दा अब राजनीतिक संघर्ष का नया मैदान बनता दिख रहा है। कांग्रेस सड़क पर उतरकर वोट बचाओ-देश बचाओ का संदेश देगी, जबकि भाजपा एसआईआर का बचाव करते हुए विपक्ष के अभियान पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में यह टकराव जिला मुख्यालयों से लेकर गांव और बूथ स्तर तक पहुंचने की संभावना है।
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