मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
भाजपा में ‘टूट’ के संकेत
सियासी हलचल
हरक ने फेंका सियासी पासा, भाजपा की निगाहें किस पर
हरक सिंह रावत के बयान ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें
भाजपा के वरिष्ठ नेता के संपर्क में होने का किया दावा
हरक का दावाकृएक और दिग्गज नेता कांग्रेस के संपर्क में
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 की सत्ता की जंग अभी दूर है, लेकिन सियासी शह-मात का खेल तेज हो गया है। भाजपा के पूर्व नेता रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी के बाद अब एक और संभावित राजनीतिक उलटफेर के दावे ने भाजपा के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ाने का माहौल बना दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने दावा किया है कि भाजपा का एक वरिष्ठ नेता लगातार उनके संपर्क में है। इतना ही नहीं, इस नेता के साथ दो-तीन दौर की बातचीत भी हो चुकी है। हरक के इस दावे ने उत्तराखंड की राजनीति में नया सवाल खड़ा कर दिया हैकृकि क्या 2027 की लड़ाई से पहले भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, या कांग्रेस किसी बड़े राजनीतिक धमाके की पटकथा तैयार कर रही है? फिलहाल संबंधित नेता का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन दावे ने संभावित दल-बदल को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।
रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी के बाद हरक सिंह रावत का नया दावा कांग्रेस के लिए राजनीतिक बढ़त का संदेश देने का अवसर बन गया है। पार्टी यह संकेत देना चाहेगी कि चुनाव से पहले भाजपा के नेताओं में भी नए राजनीतिक विकल्प तलाशने की प्रवृत्ति है। यदि हरक का दावा हकीकत में बदलता है, तो कांग्रेस इसे भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक झटके और अपने लिए सियासी संजीवनी के तौर पर पेश कर सकती है। भाजपा के लिए परेशानी केवल किसी एक नेता के संभावित पाला बदलने तक सीमित नहीं होगी। यदि संबंधित नेता का अपने क्षेत्र में प्रभाव और समर्थकों का मजबूत आधार है, तो इसका असर स्थानीय चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, नेता की पहचान और उसके अगले कदम की पुष्टि के बिना किसी बड़े राजनीतिक नुकसान का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
हरक सिंह रावत उत्तराखंड की राजनीति के उन नेताओं में हैं, जो अपने बयानों से चुनावी माहौल गरमाने का माद्दा रखते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता से दो-तीन बार बातचीत होने का दावा करके उन्होंने राजनीतिक चर्चा के केंद्र में एक ऐसा सवाल ला दिया है, जिसका जवाब फिलहाल उनके पास ही माना जा रहा है। नाम उजागर नहीं होने से अटकलों का दायरा बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम तथ्य यही है कि बातचीत का दावा अभी कांग्रेस में औपचारिक शामिल होने की पुष्टि नहीं है। ऐसे में हरक का बयान एक संभावित राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत तो देता है, लेकिन अंतिम तस्वीर सामने आना बाकी है।
विधानसभा चुनाव से पहले किसी दूसरे दल के वरिष्ठ नेता के संपर्क में होने का दावा राजनीतिक रूप से अहम होता है। इससे विरोधी दल के संगठन में असंतोष का संदेश देने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। कांग्रेस के लिए यह दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसे 2027 में भाजपा को चुनौती देने के लिए संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक माहौलकृदोनों की जरूरत होगी। दूसरी ओर, भाजपा के सामने इस दावे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय अपने संगठन और नेताओं के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती होगी। यदि कोई वरिष्ठ नेता वास्तव में पार्टी छोड़ता है, तो सवाल उठेंगे कि आखिर असंतोष की वजह क्या थी और नेतृत्व उसे समय रहते दूर क्यों नहीं कर पाया।
उत्तराखंड की राजनीति में चुनाव नजदीक आते ही टिकट, राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर समीकरण बदलते रहे हैं। ऐसे में नौटियाल की वापसी और हरक का नया दावा आने वाले महीनों में संभावित राजनीतिक आवाजाही की भूमिका तैयार कर सकता है। कांग्रेस के लिए चुनौती इस संभावित बढ़त को वास्तविक चुनावी ताकत में बदलने की होगी। वहीं भाजपा को यह साबित करना होगा कि उसके संगठन की मजबूती किसी एक-दो नेताओं के आने-जाने से प्रभावित नहीं होती।
फिलहाल हरक सिंह रावत ने सियासी गेंद भाजपा के पाले में डाल दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संपर्क में बताए जा रहे नेता का नाम कब सामने आता है और क्या बातचीत वास्तव में कांग्रेस में नई राजनीतिक एंट्री का रास्ता खोलती है। 2027 की चुनावी जंग में अभी वक्त है, लेकिन सियासी संदेश साफ हैकृलड़ाई केवल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की नहीं, बल्कि चुनाव से पहले विरोधी खेमे की राजनीतिक जमीन कमजोर करने की भी होगी।
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