गुरुवार, 3 सितंबर 2026
‘20 करोड़‘ का बम
उत्तराखंड में वायरल वीडियो-आडियो ने बढ़ाई सनसनी
निष्कासन के बाद आशुतोष नेगी ने लगाए हैं गंभीर आरोप
यूकेडी पर राष्ट्रीय दलों से कथित साठगांठ का किया दावा
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो,सियासी हलचल बढ़ी
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2027 से पहले उत्तराखंड क्रांति दल यानी यूकेडी के भीतर छिड़ी जंग अब पार्टी की चौखट से निकलकर सोशल मीडिया के मैदान में पहुंच गई है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए गए आशुतोष नेगी के कथित बयानों और उनसे जुड़े वीडियो-आडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति में सनसनी फैल गई है। सबसे ज्यादा चर्चा उस 20 करोड़ के कथित लेन-देन और राजनीतिक साठगांठ को लेकर है, जिसका आरोप नेगी की ओर से लगाया गया है। यूकेडी ने नेगी को अनुशासनहीनता और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कथित भ्रामक एवं तथ्यहीन बयान देने के आरोप में छह वर्ष के लिए निष्कासित किया है। लेकिन निष्कासन के बाद नेगी के तेवर नरम होने के बजाय और तीखे हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आ रहे वीडियो और कथित आडियो को लेकर यूकेडी के समर्थकों से लेकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक बहस तेज है। वायरल सामग्री में नेगी से जुड़े बयानों और पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो या आडयो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए इनमें किए गए दावों को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि आरोप और दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। लेकिन राजनीति में वायरल सामग्री का असर कई बार उसकी सत्यता की जांच से पहले ही दिखाई देने लगता है। यही इस समय यूकेडी के साथ हो रहा है।
नेगी ने आरोप लगाया है कि उन्हें राजनीतिक रूप से निबटाने के लिए 20 करोड़ रुपये की कथित सुपारी का खेल हुआ। उन्होंने इसके लिए यूकेडी के कुछ नेताओं पर राष्ट्रीय दलों के साथ कथित साठगांठ का आरोप भी लगाया है। यही आरोप अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। क्योंकि यदि आरोप निराधार हैं तो यूकेडी नेतृत्व के सामने उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज करने और स्थिति जनता के सामने रखने की चुनौती है। दूसरी ओर, यदि नेगी अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने लाते हैं तो विवाद का राजनीतिक असर कहीं बड़ा हो सकता है। फिलहाल 20 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
यूकेडी उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति और राज्य आंदोलन की विरासत से जुड़ा दल है। ऐसे में उसके नेताओं पर राष्ट्रीय दलों से कथित साठगांठ के आरोप सामान्य राजनीतिक बयान से कहीं ज्यादा गंभीर माने जाएंगे। 2027 के चुनाव में यूकेडी खुद को भाजपा और कांग्रेस के विकल्प के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय पार्टी के भीतर से ही नेतृत्व और राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठना संगठन के लिए बड़ी चुनौती है। नेगी प्रकरण ने एक और सवाल खड़ा किया हैकृकि क्या उक्रांद चुनावी जमीन मजबूत करने से पहले अपने घर की राजनीतिक लड़ाई सुलझा पाएगा?
यूकेडी की अनुशासनात्मक कार्रवाई के बावजूद नेगी के तेवर आक्रामक बने हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए खुद को अब भी उक्रांद की विचारधारा से जुड़ा बताया है। दूसरी ओर पार्टी का कहना है कि निष्कासन के बाद वह यूकेडी के नाम, झंडे और चुनाव चिह्न का अधिकृत रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकते। यानी लड़ाई अब केवल एक नेता के पार्टी से बाहर होने की नहीं रही। यह नेतृत्व बनाम असहमति, संगठन बनाम व्यक्तिगत राजनीतिक दावे और क्षेत्रीय दल की विश्वसनीयता की लड़ाई बनती जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और आडियो ने इस विवाद को तेजी से जनता तक पहुंचा दिया है। हालांकि वायरल सामग्री की प्रमाणिकता की जांच जरूरी है, लेकिन इससे पैदा हुई राजनीतिक बहस को नजरअंदाज करना यूकेडी के लिए आसान नहीं होगा। 2027 के चुनाव में यदि यूकेडी जनता के बीच तीसरे विकल्प की बात लेकर जाता है तो उसे सबसे पहले यह साबित करना होगा कि उसके फैसले और उम्मीदवार किसी राष्ट्रीय दल की छाया में नहीं, बल्कि उत्तराखंड के मुद्दों पर स्वतंत्र राजनीतिक लाइन पर खड़े हैं। आशुतोष नेगी के आरोपों ने इसी सवाल को सबसे ज्यादा हवा दी है।
20 करोड़ का दावा सच है या सियासी विस्फोटकृइसका जवाब जांच और प्रमाण देंगे। लेकिन इतना तय है कि वायरल वीडियो-आडियो ने 2027 से पहले यूकेडी के भीतर की आग को सार्वजनिक बहस में जरूर ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नेगी अगला खुलासा करते हैं या यूकेडी नेतृत्व इन आरोपों का कोई ठोस जवाब सामने रखता है।
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