रविवार, 18 अक्टूबर 2026

अंकिता को न्याय के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान

उत्तराखंड बंद की तैयारी तेज करने की मांग,एक मंच पर आने का आह्वान कांग्रेस और यूकेडी को सीधा संदेशकृअब बिखरी आवाजों से काम नहीं चलेगा कथित वीआईपी प्रकरण में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच के लिए होगा आंदोलन देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में सियासी हलचल के बीच अब आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर ले जाने की मांग तेज होने लगी है। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने संपूर्ण उत्तराखंड बंद की रणनीति तैयार करने के लिए सर्वदलीय और सर्व सामाजिक संगठनों की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल समेत सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से दो टूक कहा कि अब राजनीतिक मतभेदों और अलग-अलग मंचों की राजनीति से ऊपर उठकर अंकिता को न्याय दिलाने के लिए एकजुट होना होगा। डिमरी ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने, दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद से हटाने और हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष सीबीआई जांच सुनिश्चित कराने के लिए अब निर्णायक लड़ाई जरूरी है। उनके मुताबिक, यह मामला केवल एक हत्याकांड तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और न्याय व्यवस्था पर जनता के भरोसे से जुड़ चुका है। मोहित डिमरी ने प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस और क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल से आंदोलन की अगुवाई करने के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब अंकिता को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठ रही है, तब सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को साझा मंच पर लाकर आंदोलन की स्पष्ट रणनीति तय की जानी चाहिए। उनका कहना है कि अलग-अलग कार्यक्रमों और बयानों से जनभावनाओं को निर्णायक दिशा नहीं मिल सकती। जरूरत इस बात की है कि सभी दल बैठकर तय करें कि प्रदेशव्यापी बंद कब और कैसे आयोजित किया जाए, आंदोलन को किन चरणों में आगे बढ़ाया जाए और न्याय की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह मजबूती से उठाया जाए। डिमरी ने कहा कि कांग्रेस और यूकेडी को इस मुद्दे पर पहल करनी चाहिए। यह समय राजनीतिक लाभ-हानि का हिसाब लगाने का नहीं, बल्कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग पर एकजुट होने का है। मोहित डिमरी ने कहा कि अंकिता प्रकरण को लेकर पहले भी दो बार उत्तराखंड बंद का आह्वान किया जा चुका है और उसे व्यापक समर्थन मिला था। अब आंदोलन को और व्यापक, संगठित तथा प्रभावी बनाने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि अगला कदम किसी एक संगठन की पहल तक सीमित न रहे, बल्कि सभी दलों और सामाजिक संगठनों की सहमति से प्रदेशव्यापी बंद की रणनीति तैयार की जाए। उनके अनुसार, जब किसी मुद्दे पर समाज के अलग-अलग वर्गों में आक्रोश और न्याय की मांग हो, तो राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वह उस आवाज को साझा मंच दे। सर्वदलीय बैठक के माध्यम से आंदोलन की दिशा, कार्यक्रम और आगे की रणनीति तय की जा सकती है। डिमरी ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई को किसी एक परिवार या संगठन का संघर्ष मानना भूल होगी। यह महिलाओं की सुरक्षा, सत्ता और व्यवस्था की जवाबदेही तथा प्रदेश की अस्मिता से जुड़ा सवाल है। उन्होंने सिक्किम में इस मुद्दे पर दिखाई जा रही एकजुटता का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां बंद का आह्वान किया जा रहा है, तो उत्तराखंड में भी व्यापक जनएकजुटता के साथ आंदोलन की रणनीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश की बेटी के साथ हुई घटना ने पूरे समाज को झकझोरा, वहां न्याय की मांग पर बिखराव नहीं, बल्कि साझा संकल्प दिखाई देना चाहिए। अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल सार्वजनिक बहस में बने हुए हैं। मोहित डिमरी ने इस पहलू की निष्पक्ष सीबीआई जांच और सभी संबंधित सवालों के तथ्यात्मक समाधान की मांग की है। उन्होंने दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग भी दोहराई। प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों की मांग है कि कथित वीआईपी प्रकरण की जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े और जनता के सामने तथ्य आएं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका और दोष का निर्धारण जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए। मोहित डिमरी की अपील ने कांग्रेस, यूकेडी और सामाजिक संगठनों के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करने का सवाल खड़ा कर दिया है। क्या सभी संगठन साझा मंच पर आएंगे? क्या प्रदेशव्यापी बंद की तारीख और रणनीति पर सहमति बनेगी? या अंकिता को न्याय दिलाने का मुद्दा अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रहेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा तय कर सकते हैं।

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