रविवार, 18 अक्टूबर 2026

मंत्री विवाद से ‘फंसी’ भाजपा

2027 चुनाव से पहले बैकफुट पर भाजपा, कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग कैबिनेट मंत्री आर्य और पति के बीच का झगड़ा बना भाजपा के लिए नई चुनौती 210 करोड़ की कथित संपत्ति से मिड-डे मील राशन तक उठ गए हैं कई सवाल कांग्रेस ने मांगा हिसाब, निष्पक्ष जांच की मांग से बढ़ा उत्तराखंड में सियासी दबाव देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़ा विवाद भाजपा सरकार के लिए नई राजनीतिक चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। मंत्री और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से निकलकर भ्रष्टाचार, कथित संपत्ति और सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं के आरोपों तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को हाथोंहाथ लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जनता के सामने पूरा सच आना चाहिए। मामले ने उस समय नया मोड़ लिया, जब रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू ने मंत्री पर करीब 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया और इसकी जांच की मांग की। साहू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोपों को सार्वजनिक किया। दूसरी ओर, रेखा आर्य ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया है। ऐसे में फिलहाल ये आरोप हैं, जिनकी सत्यता जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्थापित हो सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेखा आर्य के साथ यदि उत्पीड़न हुआ है तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए, लेकिन उनके पति की ओर से लगाए गए कथित संपत्ति संबंधी आरोपों और मिड-डे मील के राशन से जुड़े सवालों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से भी इस मामले में सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है। कांग्रेस के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार के सवाल पर घेरने का उसे नया अवसर मिला है। पार्टी अब इस प्रकरण को केवल पति-पत्नी के बीच का विवाद मानकर छोड़ने के बजाय सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़ रही है। हालांकि, आरोपों को प्रमाणित करने की जिम्मेदारी जांच और साक्ष्यों की होगी। विवाद के दो प्रमुख पहलू हैं। पहला, मंत्री के खिलाफ 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप और दूसरा, सरकारी योजनाओं से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के सवाल। कांग्रेस की मांग है कि इन पहलुओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों के पीछे तथ्य हैं या नहीं। यदि संपत्ति संबंधी आरोप लगाए गए हैं तो उनका परीक्षण दस्तावेजों, आय के स्रोतों, संपत्ति के स्वामित्व और अन्य प्रासंगिक वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। इसी तरह, मिड-डे मील के राशन से संबंधित आरोपों की भी तथ्यात्मक जांच जरूरी है। केवल राजनीतिक बयानबाजी से न आरोप सिद्ध होते हैं, न किसी को दोषमुक्त किया जा सकता है। उत्तराखंड में चुनावी राजनीति अब धीरे-धीरे तेज होने लगी है। ऐसे समय में किसी मंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आना सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। विपक्ष इन आरोपों को चुनावी बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश करेगा, जबकि भाजपा के सामने आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की चुनौती होगी। रेखा आर्य पहले ही अपने पति के खिलाफ उत्पीड़न, धमकी और अन्य गंभीर आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हैं। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया है। उनके पति ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है और मंत्री पर पलटवार किया है। इस तरह विवाद के दोनों पक्षों के आरोपों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस के लिए यह प्रकरण भाजपा को घेरने का नया अवसर जरूर है, लेकिन उसकी धार इस बात से तय होगी कि वह आरोपों के समर्थन में कितने ठोस तथ्य सामने रखती है। भाजपा के लिए भी केवल आरोपों को राजनीतिक साजिश बताना पर्याप्त नहीं होगा। जनता यह जानना चाहेगी कि कथित संपत्ति और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच क्यों और कैसे हो रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस अपने वादे के मुताबिक कौन-से दस्तावेज और तथ्य सार्वजनिक करती है तथा सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है। चुनाव से पहले यह प्रकरण भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव का नया केंद्र बन सकता है।

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