सोमवार, 5 अक्टूबर 2026
रावत की ‘यात्रा’ पर सैलजा की ‘रोक’
उत्तराखंड कांग्रेस में फिर छिड़ा घमासान,चुनावी तैयारी के बीच ‘खींचतान’
बिना इजाजत जनसंवाद यात्रा निकालने पर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी नाराज
कांग्रेस संगठन ने उठाए सवाल, तालमेल की कमी से सतह पर आई खींचतान
सैलजा ने पत्र में लिखा कि साझा रणनीति के बिना चुनावी राह नहीं आसान
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर अंदरूनी समन्वय का सवाल उठ खड़ा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत की ओर से निकाली जा रही धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की आपत्ति ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को फिर सतह पर ला दिया है। सैलजा ने रावत को पत्र भेजकर यात्रा के संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी और प्रदेश प्रभारी से चर्चा नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही चुनाव के नजदीक प्रदेश संगठन के समानांतर कोई कार्यक्रम नहीं चलाने की बात कही है।
रावत की यात्रा ऐसे समय शुरू हुई है, जब कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा में रावत ने जनता, किसानों और व्यापारियों से संवाद का कार्यक्रम रखा है। यात्रा में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी देखी गई। दूसरी ओर पार्टी संगठन का तर्क है कि चुनावी समय में सभी वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम संगठन की साझा रणनीति और समन्वय के साथ होने चाहिए।
सैलजा की आपत्ति का केंद्र यात्रा का उद्देश्य नहीं, बल्कि उसका संगठन के साथ समन्वय बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने रावत से कहा है कि यात्रा के बारे में न तो प्रदेश प्रभारी और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को चिंता है कि अलग-अलग नेताओं के स्वतंत्र कार्यक्रमों से संगठनात्मक गतिविधियों में समानांतरता का संदेश जा सकता है। सैलजा ने रावत के हालिया कुछ बयानों का भी उल्लेख करते हुए चुनाव के नजदीक पार्टी को एकजुट होकर मैदान में उतरने की जरूरत बताई है। उन्होंने यात्रा को आगे न बढ़ाने का आग्रह किया है।
दूसरी तरफ हरीश रावत की राजनीतिक सक्रियता लगातार चर्चा में है। अक्टूबर की शुरुआत में उन्होंने हरिद्वार से धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा शुरू की। इसके बाद हरिद्वार ग्रामीण, लक्सर और खानपुर क्षेत्र में उनके कार्यक्रम हुए। हालिया रिपोर्टों में रावत के खानपुर से 2027 का चुनाव लड़ने की इच्छा जताने की बात भी सामने आई है। यही वजह है कि यात्रा को केवल जनसंवाद कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा। रावत की सक्रियता, उनका क्षेत्रीय दौरा और कार्यकर्ताओं की भागीदारी इसे कांग्रेस की आगामी चुनावी राजनीति से जोड़ रही है। हालांकि यात्रा के राजनीतिक उद्देश्य या भविष्य की चुनावी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष रावत अथवा पार्टी नेतृत्व के स्पष्ट बयान के बाद ही निकाला जा सकता है।
हरीश रावत और कांग्रेस संगठन के बीच मतभेद का यह पहला मामला नहीं है। इस वर्ष भी रावत की संगठनात्मक भूमिका और पार्टी के भीतर समन्वय को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। अप्रैल में सैलजा और रावत की मुलाकात को संगठन के भीतर सुलह की कोशिश के रूप में देखा गया था। अब कुछ ही महीनों के अंतराल में यात्रा को लेकर सैलजा की आपत्ति ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया हैकृकि उत्तराखंड कांग्रेस में फैसले संगठन की सामूहिक रणनीति से होंगे या वरिष्ठ नेता अपनी राजनीतिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाएंगे? कांग्रेस के लिए मौजूदा विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को बूथ स्तर तक संगठन सक्रिय करने के साथ वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल भी कायम रखना है। एक ओर हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेता अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं, वहीं प्रदेश नेतृत्व चुनावी अभियान को संगठन के केंद्रीकृत ढांचे में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
सैलजा की आपत्ति के बाद अब निगाहें रावत की अगली प्रतिक्रिया पर हैं। यदि यात्रा जारी रहती है तो संगठन और वरिष्ठ नेतृत्व के बीच समन्वय का सवाल और गहरा सकता है। यदि कार्यक्रम को पार्टी के आधिकारिक अभियान के साथ जोड़ा जाता है तो विवाद का रास्ता भी निकल सकता है। फिलहाल इतना साफ है कि यात्रा ने कांग्रेस के भीतर सिर्फ जनसंवाद का मुद्दा नहीं उठाया है, बल्कि चुनावी वर्ष में संगठन, नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच अधिकार-समन्वय की बहस को फिर सामने ला दिया है।
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