बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
गैरसैंण से सियासी संदेश देगी धामी सरकार
27 अक्टूबर से भराड़ीसैंण ;गैरसैंणद्धमें होगा विधानसभा सत्र
पांच हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट लाने की है तैयारी
चुनाव से पहले पहाड़ के विकास, क्षेत्रीय असंतुलन पर फोकस
जनसमस्याओं पर प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी में है विपक्ष
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा का अगला सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आयोजित करने का निर्णय लिया है। सत्र 27 अक्टूबर से शुरू होगा। विधानसभा सचिवालय की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। सत्र के दौरान सरकार करीब पांच हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी पेश कर सकती है। ऐसे में यह सत्र विधायी कामकाज के साथ-साथ चुनावी वर्ष से पहले सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गैरसैंण उत्तराखंड की राजनीति में केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों की आकांक्षाओं और राजधानी से जुड़े भावनात्मक सवालों का प्रतीक रहा है। राज्य गठन के बाद से ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। सरकारों ने इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा देकर यहां विधानसभा सत्र आयोजित करने की परंपरा को आगे बढ़ाया, लेकिन राजधानी के सवाल का स्थायी समाधान अब भी राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए गैरसैंण में सत्र आयोजित करने का राजनीतिक महत्व भी है। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, सड़क संपर्क और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े सवाल लंबे समय से चर्चा में हैं। गैरसैंण में सदन की बैठक के माध्यम से सरकार इन मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दे सकती है। हालांकि, पहाड़ की जनता के लिए प्रतीकात्मक घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण यह होगा कि इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कितनी ठोस प्रगति हुई है।
सरकार के सामने चुनौती यह भी होगी कि गैरसैंण में सत्र आयोजित करने का संदेश केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर और पलायन पर प्रभावी नियंत्रण जैसे विषयों पर सरकार को अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का स्पष्ट ब्योरा देना पड़ सकता है। सत्र में करीब पांच हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट लाए जाने की तैयारी है। इसके लिए विभिन्न विभागों से बजट प्रस्ताव मांगे जा चुके हैं। अनुपूरक बजट के जरिये चालू वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त धनराशि की जरूरत वाली योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रावधान किए जा सकते हैं।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अतिरिक्त बजट का कितना हिस्सा विकास कार्यों, आधारभूत ढांचे, जनकल्याणकारी योजनाओं और पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों पर खर्च करने का प्रस्ताव रखा जाता है। चुनाव से पहले पेश होने वाले इस बजट में सरकार की प्राथमिकताएं राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती हैं। विपक्ष भी बजट के प्रावधानों के आधार पर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। विधानसभा सत्र में विपक्ष के सामने बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मुद्दे उठाने का अवसर होगा। विपक्ष यह सवाल उठा सकता है कि सरकार के दावों का लाभ दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक कितना पहुंचा है और गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने के बाद वहां प्रशासनिक गतिविधियों को अपेक्षित गति क्यों नहीं मिली।
हालांकि, विपक्ष की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह सदन में तथ्यों और ठोस सवालों के साथ सरकार को कितना जवाबदेह बना पाता है। वहीं सरकार के सामने भी अपनी योजनाओं, खर्च और विकास संबंधी दावों को स्पष्ट करने की चुनौती रहेगी। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के अनुसार, विधानसभा सचिवालय गैरसैंण में सत्र आयोजित करने के लिए तैयार है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी।
कुल मिलाकर, गैरसैंण में प्रस्तावित यह सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। सरकार जहां विकास और जनकल्याण के एजेंडे को सामने रखने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठा सकता है। चुनावी वर्ष में गैरसैंण से निकलने वाला राजनीतिक संदेश कितना प्रभावी होगा, यह सदन में होने वाली बहस और लिए जाने वाले फैसलों से तय होगा।
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