रविवार, 18 अक्टूबर 2026

अंकिता प्रकरण बना सियासी ‘रणभूमि’

भाजपा ने बताया कांग्रेस पार्टी है दोहरे चरित्र का नमूना पहले अपने आरोपी सांसद पर कार्रवाई का जवाब दे कांग्रेस चुनावी फायदे के लिए छवि खराब करने का लगाया आरोप देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में सियासी संग्राम तेज हो गया है। कांग्रेस के प्रदर्शनों और न्याय की मांग पर भाजपा ने अब तक का तीखा पलटवार करते हुए विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कांग्रेस के आंदोलन को राजनीतिक पाखंड और दोहरे चरित्र का प्रदर्शन करार देते हुए सवाल दागा कि महिलाओं के सम्मान और न्याय की दुहाई देने वाली कांग्रेस अपने ही सांसद से जुड़े यौन शोषण के आरोपों पर कब कार्रवाई करेगी? भाजपा ने आरोप लगाया कि अंकिता के दुखद प्रकरण को चुनावी हथियार बनाकर कांग्रेस देवभूमि की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड बेहद दुखद और संवेदनशील मामला है। भाजपा सरकार ने मामले में इंसाफ सुनिश्चित कराने के लिए कार्रवाई की और दोषियों को अदालत से सजा मिली। अब सीबीआई जांच में भी पूरे सच के सामने आने की उम्मीद है। ऐसे में कांग्रेस को जांच की प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए, न कि हर घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देकर जनता के बीच भ्रम फैलाना चाहिए। भाजपा का कहना है कि जब मामले में कानूनी कार्रवाई हुई है और जांच का एक पहलू अभी भी जांच एजेंसी के सामने है, तब कांग्रेस का लगातार राजनीतिक प्रदर्शन करना उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह न्याय की लड़ाई के नाम पर राजनीतिक जमीन तलाश रहा है। भाजपा विधायक ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर हमला बोलते हुए कहा कि दूसरों से जवाबदेही मांगने वाली कांग्रेस को पहले अपने नेताओं से जुड़े गंभीर आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यौन शोषण के आरोपी सांसद के मामले में कांग्रेस कब और क्या कार्रवाई करेगी? भाजपा ने इस सवाल के जरिए कांग्रेस की महिला सम्मान संबंधी राजनीति को चुनौती दी है। पार्टी का कहना है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा किसी दल के लिए चुनिंदा राजनीतिक हथियार नहीं हो सकता। यदि कांग्रेस वास्तव में महिलाओं के न्याय और सम्मान को लेकर गंभीर है, तो उसे अपने नेताओं से जुड़े मामलों में भी वही कसौटी अपनानी चाहिए, जिसकी मांग वह भाजपा से करती है। हालांकि, आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए। राजनीतिक आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं करते। अंकिता हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर बहस थमी नहीं है। अंकिता के परिजन और विपक्ष इस पहलू पर जवाब चाहते हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि जांच एजेंसी को निष्कर्ष तक पहुंचने का अवसर दिया जाना चाहिए। यही वह मुद्दा है, जिस पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। कांग्रेस कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठाकर सरकार को घेर रही है, तो भाजपा विपक्ष की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। चौहान के बयान से साफ है कि भाजपा अब रक्षात्मक रहने के बजाय कांग्रेस को उसके अपने राजनीतिक आचरण के आधार पर घेरने की रणनीति अपना रही है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। कांग्रेस इसे न्याय और जवाबदेही का मुद्दा बनाकर सरकार पर दबाव बढ़ाना चाहती है। भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक अवसरवादिता बताकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रही है। लेकिन इस सियासी टकराव के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल अंकिता के परिवार की न्याय संबंधी अपेक्षाओं और जांच की पारदर्शिता का है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, पर कथित वीआईपी से जुड़े सवालों का समाधान जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही होना चाहिए। भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलकर साफ कर दिया है कि अंकिता प्रकरण पर वह विपक्ष को बिना जवाब दिए राजनीतिक बढ़त नहीं लेने देगी। अब देखना होगा कि कांग्रेस मुन्ना चौहान के सवालों का जवाब देती है या इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की अपनी मुहिम और तेज करती है। इतना तय है कि चुनाव से पहले अंकिता प्रकरण उत्तराखंड की सियासत में बड़ा टकराव बना रहेगा।

कोई टिप्पणी नहीं: