गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026
सत्ता में वापसी के दावे ‘ख्याली पुलाव’
भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जुबानी जंग
कांग्रेस को सत्ता की दावत देने के मूड में नहीं जनता
2027 में भी नहीं पूरी होगी कांग्रेस पार्टी की हसरत
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जुबानी जंग तेज होने लगी है। कांग्रेस के सत्ता में वापसी के दावों पर भाजपा ने तीखा पलटवार करते हुए इन्हें ख्याली पुलाव करार दिया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस भले ही सत्ता में लौटने के सपने देख रही हो, लेकिन प्रदेश की जनता उसे ऐसी कोई दावत देने के मूड में नहीं है। भाजपा के इस हमले ने साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला केवल जनसभाओं और संगठनात्मक तैयारियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि राजनीतिक दावों और जवाबी हमलों के बीच भी सियासी तापमान बढ़ेगा। कांग्रेस जहां सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाकर सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है, वहीं भाजपा विपक्ष के दावों को जमीनी हकीकत से दूर बताकर उसकी चुनावी संभावनाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
भाजपा के निशाने पर कांग्रेस की वह राजनीतिक उम्मीद है, जिसके सहारे पार्टी 2027 में सत्ता परिवर्तन की संभावना जता रही है। भाजपा का तंज है कि कांग्रेस के नेता चुनाव से पहले ही जीत की दावत सजाने लगे हैं, जबकि जनता ने अभी उन्हें सत्ता की थाली परोसने का कोई संकेत नहीं दिया है। भाजपा इस बयान के जरिए कांग्रेस के आत्मविश्वास को अतिआत्मविश्वास साबित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का संदेश है कि चुनावी जीत के दावे करना और मतदाताओं का समर्थन हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं। उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की लड़ाई लंबे समय से प्रमुख चुनावी धुरी रही है। 2027 के चुनाव से पहले दोनों दल अपनी-अपनी जीत का माहौल बनाने में जुटे हैं। भाजपा संगठनात्मक तैयारियों और सरकार के कामकाज को अपनी ताकत के रूप में पेश करना चाहती है, जबकि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जन असंतोष को चुनावी समर्थन में बदलने की कोशिश कर सकती है।
ऐसे में ख्याली पुलाव वाला हमला केवल राजनीतिक कटाक्ष नहीं, बल्कि विपक्ष के चुनावी आत्मविश्वास को चुनौती देने की रणनीति भी है। भाजपा चाहती है कि कांग्रेस के सत्ता में लौटने के दावों को जनता के बीच समय से पहले की गई राजनीतिक घोषणा के रूप में देखा जाए। कांग्रेस के दावों पर भाजपा का हमला अपनी जगह है, लेकिन 2027 की चुनावी तस्वीर केवल बयानों से तय नहीं होगी। बेरोजगारी, भर्ती, पलायन, ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाएं और सरकार के प्रति जनता की धारणा जैसे मुद्दे चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा के लिए चुनौती अपने संगठनात्मक आधार को बनाए रखने और सरकार के कामकाज के प्रति जनता का भरोसा कायम रखने की होगी। वहीं, कांग्रेस के सामने अपनी एकजुटता, नेतृत्व और जमीनी संगठन को मजबूत कर सत्ता में वापसी के दावों को विश्वसनीय बनाने की चुनौती है।
फिलहाल भाजपा ने कांग्रेस के सत्ता में लौटने के दावों को खारिज करते हुए राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। लेकिन लोकतंत्र में न सत्तारूढ़ दल का आत्मविश्वास जीत की गारंटी है और न विपक्ष का दावा सत्ता तक पहुंचने का प्रमाण। 2027 में किसकी दावत सजेगी और किसके हिस्से इंतजार आएगा, इसका फैसला भाजपा के तंज या कांग्रेस के दावों से नहीं, उत्तराखंड की जनता के वोट से होगा। फिलहाल चुनाव से पहले ही सियासी रसोई गर्म है और दोनों दल अपनी-अपनी जीत का पकवान तैयार करने में जुटे हैं।
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