शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

भाजपा: बूथ से सत्ता की हैट्रिक तक

नए चुनावी प्रभारी-सह प्रभारियों ने संभाली कमान, संगठन की ताकत पर है भरोसा बूथ मजबूत करने से लेकर सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता तक पहुंचाने की रणनीति भाजपा का घोषित फोकस मेरा बूथ, सबसे मजबूत और बूथ जीता, चुनाव जीता के सूत्र पर देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। भाजपा ने चुनावी तैयारी को अब बैठकों और बयानों से आगे ले जाकर संगठन के सबसे निचले स्तर यानी बूथ तक केंद्रित करना शुरू कर दिया है। दो अक्टूबर को प्रदेश भाजपा मुख्यालय में हुई सांगठनिक बैठक ने पार्टी की चुनावी दिशा काफी हद तक साफ कर दी। नए प्रदेश प्रभारी राम माधव, सह प्रभारी बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन की मौजूदगी में प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और मंत्रियों के साथ संगठन की स्थिति और चुनावी तैयारियों पर मंथन हुआ। भाजपा का घोषित फोकस मेरा बूथ, सबसे मजबूत और बूथ जीता, चुनाव जीता के सूत्र पर है। पार्टी महामंत्री संगठन फणींद्रनाथ शर्मा ने बूथों को चुनावी रणनीति का केंद्र बनाने पर जोर दिया। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी सरकार और संगठन के काम को बूथ स्तर तक पहुंचाने तथा जनता के बीच पार्टी की मौजूदगी बढ़ाने की बात कही। बैठक में भाजपा के चुनावी लक्ष्य को भी आक्रामक तरीके से सामने रखा गया। राम माधव ने कार्यकर्ताओं से सामान्य बहुमत तक सीमित रहने के बजाय 60 से अधिक सीटों के लक्ष्य के साथ काम करने को कहा। उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं। यह लक्ष्य अपने आप में भाजपा की चुनावी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी कर रही है और संगठन को यह संदेश दिया जा रहा है कि चुनाव को सामान्य चुनाव की तरह नहीं, बल्कि नए सिरे से लड़ी जाने वाली लड़ाई के रूप में लिया जाए। भाजपा की रणनीति का दूसरा बड़ा हिस्सा सरकार के कामकाज को जनता तक ले जाना है। पार्टी नेतृत्व विधायकों और कार्यकर्ताओं से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने तथा सरकार की उपलब्धियों के साथ स्थानीय समस्याओं पर भी जनता से संवाद करने को कह चुका है। अगस्त में हुई तैयारियों में रोजगार, विकास, पलायन और स्थानीय सुविधाओं जैसे मुद्दों पर संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया था। अब चुनौती यह है कि सरकारी योजनाओं का प्रचार केवल पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि मतदाताओं तक पहुंचे। इसके लिए भाजपा ने बूथ, शक्ति केंद्र और घर-घर संपर्क की रणनीति पर जोर दिया है। अगस्त-सितंबर के संगठनात्मक कैलेंडर में बूथ सशक्तीकरण और हर घर तक संपर्क को प्रमुखता दी गई थी। राम माधव, बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन की नई टीम की तैनाती को भी 2027 की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीनों नेताओं के पहले संगठनात्मक प्रवास में जिलों, विधानसभा क्षेत्रों और बूथ स्तर तक संगठन की वास्तविक स्थिति समझने पर जोर रहा। सवाल यह है कि प्रदेश संगठन की रिपोर्ट और जमीन पर कार्यकर्ताओं की स्थिति में कितना अंतर है। यही वजह है कि आने वाले महीनों में भाजपा के लिए केवल बड़े कार्यक्रम महत्वपूर्ण नहीं होंगे। बूथ समितियों की सक्रियता, स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी, विधायकों की क्षेत्रीय पकड़, जनता की शिकायतें और संगठन के भीतर समन्वय जैसे मुद्दे भी चुनावी तैयारी की कसौटी बनेंगे। भाजपा की नई चुनावी रणनीति में युवा मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिखाई दे रहा है। बांसुरी स्वराज ने संगठनात्मक बैठक में जेन-जी और युवाओं से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पार्टी कार्यक्रमों को युवाओं की भाषा और शैली के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 का चुनाव ऐसे समय में होगा जब रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा, पलायन और युवाओं के अवसर जैसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श में प्रमुख रहेंगे। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब यही है कि संगठन की चुनावी मशीनरी को जमीन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ा जाए। पार्टी के पास सरकार, संगठन और बूथ नेटवर्क का मजबूत ढांचा है, लेकिन चुनाव में अंतिम कसौटी मतदाताओं के बीच प्रदर्शन और स्वीकार्यता होती है। इसलिए 2027 की तैयारी में भाजपा का असली मंथन केवल यह नहीं है कि कितनी बैठकें होंगी और कितने कार्यक्रम चलेंगे। असली सवाल यह है कि 70 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन जनता के बीच क्या संदेश लेकर जाएगा और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देगा। फिलहाल भाजपा ने अपनी दिशा स्पष्ट कर दी हैकृबूथ मजबूत करो, कार्यकर्ता सक्रिय करो, सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता तक ले जाओ और चुनाव को बड़े लक्ष्य के साथ लड़ो। अब आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कागज पर तैयार यह चुनावी रणनीति जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से उतरती है।

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